हेल्थ अपडेट: कम उम्र में बढ़ रही भूलने की बीमारी, दून के डॉक्टरों ने जीवनशैली बदलने की दी सलाह

देहरादून: राजधानी देहरादून के प्रमुख अस्पतालों (जैसे दून अस्पताल और ग्राफिक एरा अस्पताल) के ओपीडी में इन दिनों एक चौंकाने वाला रुझान देखने को मिल रहा है। पहले जो ‘भूलने की बीमारी’ (Dementia/Alzheimer’s) बुजुर्गों की समस्या मानी जाती थी, अब उसके लक्षण 25 से 45 वर्ष के युवाओं में भी तेजी से देखे जा रहे हैं। दून के न्यूरोलॉजिस्ट और मनोवैज्ञानिकों ने इसे एक ‘साइलेंट महामारी’ करार देते हुए युवाओं को अपनी जीवनशैली में तत्काल बदलाव करने की चेतावनी दी है।

क्या हैं इसके मुख्य कारण? डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में याददाश्त कमजोर होने के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई कारकों का मेल है:

डॉक्टरों की ‘ब्रेन हेल्थ’ एडवाइजरी दून के विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  1. 7-8 घंटे की गहरी नींद: मस्तिष्क की मरम्मत और याददाश्त को पक्का करने के लिए पर्याप्त नींद अनिवार्य है।
  2. माइंड गेम्स और रीडिंग: मोबाइल स्क्रॉल करने के बजाय सुडोकू, चेस खेलें या किताबें पढ़ें। यह ‘कॉग्निटिव रिजर्व’ बनाने में मदद करता है।
  3. फिजिकल एक्सरसाइज: रोजाना 30 मिनट की सैर या व्यायाम मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ाता है।
  4. मल्टीटास्किंग से बचें: एक समय में एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करें (Focus Training)।

समय पर जांच जरूरी यदि आप छोटी-छोटी चीजें—जैसे चाबी रखकर भूलना, परिचितों के नाम याद न आना या रास्तों में भ्रमित होना—बार-बार महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षणों को पकड़कर सही काउंसलिंग और पोषण से इस स्थिति को पलटा जा सकता है।

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