इसरो का खुलासा: बादल फटना नहीं, 69 लाख किलो के हिमखंड का गिरना था धराली तबाही की असली वजह

उत्तरकाशी/देहरादून: इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा सैटेलाइट डेटा और ‘डिजिटल एलीवेशन मॉडल’ (DEM) के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि धराली में आई आपदा प्राकृतिक संरचनात्मक विफलता का परिणाम थी।

1. मुख्य कारण: हिमखंड का टूटना (Ice-Patch Collapse) रिपोर्ट के अनुसार, श्रीकंता ग्लेशियर के नीचे लगभग 5,220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक विशाल हिमखंड (Ice Patch) अचानक टूट कर नीचे गिर गया। यह हिस्सा करीब 0.25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि इस हिमखंड का वजन लगभग 6.9 मिलियन किलोग्राम (69 लाख किलो) था।

2. तबाही की प्रक्रिया (Chain Reaction)

3. पुरानी धारणाएं हुई गलत शुरुआती जांच में इसे बादल फटना या किसी ग्लेशियर झील का फटना (GLOF) माना जा रहा था। हालांकि, इसरो की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उस दिन ऐसी कोई मौसमी घटना नहीं हुई थी। यह आपदा विशुद्ध रूप से ग्लेशियर के कमजोर होने (Deglaciation) और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हुई संरचनात्मक गिरावट थी।

4. 15 साल बाद दिखी ऐसी हलचल इसरो के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि पिछले 15 वर्षों के सैटेलाइट रिकॉर्ड में इस तरह के हिमखंड का टूटना नहीं देखा गया था। यह घटना हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों की अस्थिरता की ओर इशारा करती है।

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