उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा को लेकर National Green Tribunal (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों की carrying capacity (क्षमता) तय की जाए।
NGT का मानना है कि हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में तीर्थ स्थलों की अधिकतम क्षमता निर्धारित करना बेहद जरूरी है, ताकि भीड़ नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एक सप्ताह के भीतर जमा करने का आदेश दिया है। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे धामों में एक समय में कितने श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा सकता है।
इसके अलावा, NGT ने यात्रा मार्गों पर कचरा प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, जल स्रोतों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी ध्यान देने को कहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा, साथ ही हिमालयी क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरण को भी संरक्षित करेगा।
