उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड होगा समाप्त: 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड बोर्ड (UBSE) से लेनी होगी मान्यता, छात्र संख्या घटने पर सरकार का बड़ा फैसला।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम राज्य में “समान शिक्षा प्रणाली” लागू करने और मुस्लिम समुदाय के बच्चों को आधुनिक शिक्षा (Modern Education) से जोड़ने के लिए उठाया गया है।


1. बोर्ड समाप्ति का कारण (छात्र संख्या में गिरावट)

सरकार की जांच और हालिया रिपोर्ट्स में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे:

2. उत्तराखंड बोर्ड (UBSE) से संबद्धता की अनिवार्यता

1 जुलाई 2026 के बाद, राज्य में कोई भी मदरसा स्वतंत्र ‘मदरसा बोर्ड’ के तहत काम नहीं करेगा।

3. धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे धार्मिक शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे आधुनिक विषयों के साथ संतुलित करना होगा:

4. शिक्षकों और छात्रों पर प्रभाव

5. वक्फ बोर्ड की भूमिका

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी पहले ही “मॉडल मदरसों” की वकालत की थी। सरकार के इस फैसले से अब वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाले मदरसों में भी ड्रेस कोड और स्मार्ट क्लासरूम जैसी व्यवस्थाएं लागू होने की संभावना है।


चुनौतियां और विवाद

इस फैसले का कुछ धार्मिक संगठनों और मदरसा संचालकों ने विरोध भी शुरू किया है। उनका तर्क है कि इससे मदरसों की स्वायत्तता (Autonomy) और धार्मिक पहचान प्रभावित होगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह निर्णय केवल छात्रों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।

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