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मोदी-जिनपिंग मुलाकात: SCO शिखर सम्मेलन 2025 में होगी अहम बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित मुलाकात 31 अगस्त 2025 को चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। यह मुलाकात भारत और चीन के बीच 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद तनावग्रस्त रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस बैठक पर वैश्विक नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगी, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीति पर भी असर डालेगी। #ModiXiMeeting #SCOSummit2025 #IndiaChinaRelations

पृष्ठभूमि और महत्व

यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% तक टैरिफ लगाए जाने से तनाव बढ़ा है। साथ ही, भारत और चीन ने हाल ही में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुई मोदी-जिनपिंग मुलाकात के बाद विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों को फिर से शुरू करना शामिल है। यह मुलाकात भारत की बहु-संरेखण नीति (मल्टी-एलाइनमेंट) को भी रेखांकित करती है, जहां भारत रूस, चीन, और पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। #IndiaChinaDetente #GlobalSouth #MultiAlignment

SCO शिखर सम्मेलन का महत्व

SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में आयोजित होगा, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल हैं, भाग लेंगे। यह 2001 में स्थापित SCO का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा, जिसे चीन “नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों” को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखता है। सम्मेलन में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। #SCOSummit2025 #GlobalDiplomacy #TianjinSummit

द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा

मोदी और जिनपिंग की बैठक में सीमा पर शांति बनाए रखने, व्यापार और वीजा प्रतिबंधों में ढील, और जलवायु जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत ने हाल ही में लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर एक समझौते को अंतिम रूप दिया है, जिससे सीमा तनाव कम करने में मदद मिली है। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करना और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे कदम भी उठाए गए हैं। #BorderPeace #IndiaChinaTrade #KailashMansarovar

वैश्विक संदर्भ और भारत की रणनीति

यह मुलाकात भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाती है, खासकर जब भारत को रूस से तेल खरीद और व्यापार असंतुलन को लेकर पश्चिमी आलोचना और व्यापार प्रतिशोध का सामना करना पड़ रहा है। भारत आतंकवाद के खिलाफ मजबूत और स्पष्ट निंदा पर जोर देगा, खासकर पाकिस्तान की उपस्थिति में। SCO मंच भारत को चीन और रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने का अवसर प्रदान करता है, जबकि वह जापान और आसियान जैसे अन्य सहयोगियों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत करता है। #StrategicAutonomy #IndiaForeignPolicy #AntiTerrorism

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