उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अवैध खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य के वन विकास निगम, वन विभाग और खनन विभाग के प्रमुखों को नदियों में मशीनों के इस्तेमाल से होने वाले खनन पर एक एक्शन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की खनन गतिविधियां केवल सरकार या वन निगम के माध्यम से ही होनी चाहिए। #UttarakhandHighCourt #IllegalMining #MiningBan
यह फैसला नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर खनन सरकारी एजेंसियां करती हैं, तो वे पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन को ध्यान में रखकर काम करेंगी। इसके विपरीत, निजी ठेकेदारों का प्राथमिक लक्ष्य लाभ होता है, जिसके कारण वे अक्सर नियमों का उल्लंघन करते हैं। इस आदेश से राज्य में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होने की उम्मीद है। #EnvironmentProtection #RiverMining
इस मामले में कोर्ट ने पहले भी कई बार सख्त निर्देश दिए हैं। हरिद्वार में 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया था और जिला प्रशासन को उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति तुरंत काटने के निर्देश दिए गए थे। यह दिखाता है कि कोर्ट अवैध खनन के प्रति कितनी गंभीर है और पर्यावरण की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। #JudicialActivism #ForestDepartment
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अवैध खनन पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: सरकार या वन निगम ही करेंगे खनन
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