पूर्व AIIMS ऋषिकेश निदेशक डॉ. रवि कांत और अन्य अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को उजागर किया है। यह मामला 16-बेड वाले कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) की स्थापना में ₹8.08 करोड़ के खर्च के बावजूद यूनिट के कार्यशील न होने से संबंधित है। सीबीआई की जांच में पाया गया कि आपूर्ति की गई सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी और निर्माण कार्य भी अधूरा था।
CCU परियोजना में अनियमितताएँ
सीबीआई के अनुसार, दिसंबर 2017 में शुरू की गई इस परियोजना में ₹8.08 करोड़ का निवेश किया गया था। हालांकि, मार्च 2025 में की गई संयुक्त निरीक्षण में पाया गया कि CCU कभी कार्यशील नहीं हो पाई। निर्माण कार्यों में ₹2.73 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि आपूर्ति की गई सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी।
आरोपी और आरोप
सीबीआई ने डॉ. रवि कांत, डॉ. राजेश पासरीचा (तत्कालीन आपूर्ति अधिकारी), और रूप सिंह (तत्कालीन स्टोरकीपर) के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के तहत भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएँ लगाई गई हैं।
पूर्व में हुई गड़बड़ियाँ
यह पहली बार नहीं है जब AIIMS ऋषिकेश में अनियमितताएँ सामने आई हैं। 2022 में भी सीबीआई ने रोड स्वीपिंग मशीन और मेडिकल स्टोर की स्थापना में गड़बड़ियों के आरोप में जांच की थी, जिसमें ₹4.41 करोड़ का नुकसान हुआ था।
इस मामले में सीबीआई की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। यह स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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