बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और हास्य कलाकार गोवर्धन असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती थे। असरानी ने अपने लंबे करियर में करीब 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और फिल्म शोले में जेलर की भूमिका से घर-घर में मशहूर हुए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है।
पहली और आखिरी फिल्म
असरानी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1967 में फिल्म हरे कांच की चूड़ियाँ से की थी।
उनकी आखिरी फिल्म Welcome to Bajrangpur (2023) रही, जिसमें उन्होंने अपने प्रसिद्ध कॉमिक अंदाज़ में दर्शकों को फिर से हँसाया।
‘हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं’ — एक अमर संवाद
1975 में आई शोले में असरानी का निभाया जेलर का किरदार हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया।
उनका संवाद “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं…” आज भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है।
कॉमेडियन से निर्देशक तक का सफर
असरानी न केवल एक शानदार कॉमेडियन थे बल्कि उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया।
उन्होंने Hum Nahin Sudhrenge और Udaan जैसी फिल्मों को निर्देशित किया और अपने हास्य को पर्दे के पीछे से भी जीवंत रखा।
राजेश खन्ना से दोस्ती और यादगार जोड़ी
असरानी और राजेश खन्ना की जोड़ी पर्दे पर बेहद लोकप्रिय रही। दोनों ने मिलकर करीब 25 फिल्मों में काम किया।
उनकी दोस्ती फिल्मी दुनिया की मशहूर कहानियों में गिनी जाती है।
पुरस्कार और उपलब्धियाँ
फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड — Aaj Ki Taaza Khabar (1974)
फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड — Balika Badhu (1981)
FTII पुणे के प्रमुख छात्रों में से एक रहे असरानी भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय की मिसाल बन गए।
असरानी की विरासत
“असरानी सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक युग थे — जिन्होंने हँसी को अभिनय का सबसे सुंदर रूप बना दिया।”
उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लेकिन उनका हँसाने वाला अंदाज़ और संवाद सदियों तक दर्शकों को याद रहेंगे।