देहरादून के बड़े अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों ने खुलासा किया कि हर महीने औसतन 5 लोग ‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ (BPD) की चपेट में आ रहे हैं। ये वो बीमारी है जिसमें इंसान का मूड पल-पल में उल्टा-पल्टा हो जाता है – कभी प्यार की चरम सीमा, कभी गुस्से की आग, कभी खुद को खत्म करने की सोच! सबसे डरावनी बात – मरीज ज्यादातर 18-35 साल के युवा हैं, जिनमें लड़कियां ज्यादा। डॉक्टर बता रहे हैं कि दिमाग के केमिकल (सेरोटोनिन, डोपामाइन) का असंतुलन मुख्य विलेन है, लेकिन ट्रिगर हैं – ब्रेकअप, जॉब स्ट्रेस, फैमिली प्रेशर और सोशल मीडिया की परफेक्ट लाइफ वाली तुलना।
शहर के नामी साइकियाट्रिस्ट डॉ. एसके गुप्ता (नाम बदला गया) ने बताया – “पिछले 6 महीनों में 32 केस आए। एक 24 साल की लड़की तो आई जो 2 घंटे में 10 बार मूड स्विंग करती थी। कभी रोती, कभी हंसती, कभी खुद को चाकू से काटने की कोशिश! हमने DBT थेरेपी शुरू की, अब 70% बेहतर है।” दूसरी तरफ एक 29 साल का लड़का – “मैं अपनी गर्लफ्रेंड को इतना प्यार करता हूं कि अगर वो 5 मिनट लेट रिप्लाई करे तो लगता है दुनिया खत्म हो गई।” डॉक्टरों का कहना है कि BPD के मरीज रिश्ते तोड़ देते हैं, जॉब छोड़ देते हैं, यहां तक कि सुसाइड की कोशिश तक कर बैठते हैं। देहरादून में अब हर हफ्ते 1-2 नए केस आ रहे हैं – ये आंकड़ा 2024 से दोगुना हो चुका है!
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