ऋषिकेश का विश्व प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट – जहाँ गंगा-यमुना-सरस्वती का पवित्र संगम है, जहाँ रोज हजारों श्रद्धालु पाप धोने आते हैं – आज कीचड़ और मलबे के ढेर में डूबा हुआ है! सुबह से ही तीर्थयात्री फिसल-फिसल कर गिर रहे हैं, बुजुर्ग रोते-बिलखते पैर धो रहे हैं, बच्चे कीचड़ में लथपथ होकर माँ की गोद में चिपक गए। एक आंटी जी तो 10 मिनट तक कीचड़ में फंसी रहीं, बोलीं “ये गंगा स्नान है या कीचड़ कुश्ती?” शाम की महाआरती से पहले ही लोग भागने लगे – “अरे भैया, पैर रखने की जगह नहीं, आरती क्या देखें!” पिछले हफ्ते गंगा उत्सव में 50 किलो कचरा निकला था, लेकिन आज तो पूरा घाट मलबे की भेंट चढ़ गया।
कहाँ से आया इतना मलबा? सिंचाई विभाग के अफसर बताते – “मानसून में आई बाढ़ का पुराना मलबा अभी तक नहीं हटाया गया। ऊपर से बारिश ने फिर कीचड़ जमा कर दिया।” नगर निगम वाले उंगली सिंचाई विभाग पर – “घाट हमारा नहीं, उनका है!” और सिंचाई वाले निगम पर – “सफाई तुम्हारी जिम्मेदारी!” बीच में श्रद्धालु पिस रहे हैं। एक लोकल दुकानदार भैया गुस्से में बोले, “हर साल यही ड्रामा! करोड़ों की नमामी गंगे, लेकिन घाट पर कीचड़ ही कीचड़। टूरिस्ट आते हैं, फोटो खींचते हैं और भाग जाते हैं – ‘ये इंडिया का हॉली प्लेस है?’” आज एक विदेशी टूरिस्ट तो कीचड़ में गिरकर रोने लगा, उसका कैमरा भी खराब हो गया!
अब होगा क्या? जिलाधिकारी को टैग करके लोगों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है – “@DMRishikesh जी, कब तक लापरवाही? करतारपुर कॉरिडोर साफ-सुथरा, त्रिवेणी घाट कीचड़ में!” कल सुबह 8 बजे से जेसीबी आने की खबर है, लेकिन लोग कह रहे हैं – “हर साल यही वादा, फिर भूल जाते हैं।” हे गंगे माँ, अपने भक्तों को कीचड़ से बचा लो! अगर आप भी त्रिवेणी घाट जा रहे हो तो रबर की चप्पल और धैर्य साथ रखना – वरना स्नान से पहले ही पाप बढ़ जाएंगे!
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