
नई दिल्ली/देहरादून:
कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम के रूप में चर्चित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे महत्वपूर्ण चरण अब जनता के लिए समर्पित होने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 अप्रैल 2026 को इस महत्वकांक्षी परियोजना के 12 किलोमीटर लंबे ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का उद्घाटन करेंगे।
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एशिया का सबसे बड़ा वन्यजीव गलियारा
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका 12 किमी लंबा गणेशपुर-डाटकाली एलिवेटेड रोड है। यह एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर (Wildlife Corridor) है, जिसे राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन के ऊपर बनाया गया है। इसका उद्देश्य वाहनों की रफ्तार को बढ़ाना और साथ ही नीचे जंगल में रहने वाले हाथियों और अन्य वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करना है।
सफर में ऐतिहासिक बदलाव
वर्तमान में दिल्ली से देहरादून पहुंचने में लगभग 5 से 6 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद:
समय की बचत: कुल यात्रा का समय घटकर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगा।
दूरी में कमी: एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 210 किलोमीटर है, जो पुराने रूट की तुलना में काफी कम और बाधा रहित है।
आर्थिक लाभ: बेहतर कनेक्टिविटी से उत्तराखंड में पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को जबरदस्त बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी विशेषताएं
यह एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे चार चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें डाटकाली के पास एक अत्याधुनिक 340 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, जो शिवालिक पहाड़ियों के नीचे से गुजरती है। पूरे कॉरिडोर पर सीसीटीवी निगरानी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगाया गया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए देहरादून के डाटकाली क्षेत्र और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यह परियोजना न केवल उत्तराखंड के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से आने वाले पर्यटकों के लिए सफर को सुगम और सुरक्षित बनाएगी।


