
तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट अब और तेज हो गई है। पिछले एक महीने से चल रहे छद्म युद्ध और सीधे टकराव के बीच, ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका द्वारा दिए गए 48 घंटे के युद्धविराम (Ceasefire) के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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ईरान का आक्रामक रुख: लड़ाकू विमान गिराने का दावा
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने आज आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने खाड़ी क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे एक और अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है। ईरान का कहना है कि यह विमान उनकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा था। यह पिछले 30 दिनों में तीसरी ऐसी घटना है, जिसने दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की संभावना को बढ़ा दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का रुख: “बातचीत का रास्ता बंद नहीं”
इस गंभीर घटनाक्रम के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में प्रेस वार्ता के दौरान संयमित लेकिन सख्त तेवर दिखाए। ट्रंप ने कहा, “ईरान द्वारा विमान गिराए जाने की घटनाओं का हमारी बातचीत की मेज पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन हम अपनी संपत्ति की रक्षा करना जानते हैं।” * होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान सकारात्मक रुख अपनाता है, तो तनाव कम कर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोलने पर विचार किया जा सकता है।
इजरायल का बेरूत पर भीषण प्रहार
इधर, संघर्ष की आंच लेबनान तक पहुँच चुकी है। इजरायली वायुसेना ने आज सुबह लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अब तक के सबसे भीषण हमले किए।
नुकसान: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके इतने तेज थे कि पूरा शहर दहल गया। इजरायल का दावा है कि उन्होंने हिजबुल्लाह के मुख्य कमांड सेंटर और हथियारों के गोदाम को नष्ट कर दिया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन हमलों में भारी जनहानि की आशंका जताई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। जानकारों का मानना है कि यदि अगले 24 घंटों में कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।


