
देहरादून, 5 अप्रैल 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GEIMS) हॉस्पिटल ने एक दुर्लभ और जटिल मेडिकल केस को सफलतापूर्वक संभालकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम ने एक 34 वर्षीय गर्भवती महिला की बच्चेदानी (यूटेरस) से 20 फाइब्रॉइड्स (गांठें) निकालकर सुरक्षित प्रसव (डिलीवरी) कराया। अस्पताल का दावा है कि यह देश में पहला और दुनिया में दूसरा ऐसा मामला है।
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केस की पूरी डिटेल
मरीज एक 34 वर्षीय महिला थी, जो गर्भावस्था के अंतिम चरण में थी। अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला कि उनकी बच्चेदानी में करीब 20 फाइब्रॉइड्स मौजूद हैं। फाइब्रॉइड्स गर्भाशय की दीवार में बनने वाली गैर-कैंसर वाली गांठें होती हैं, जो गर्भावस्था के दौरान कई जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। इनमें से कुछ गांठें काफी बड़ी थीं, जो बच्चे के विकास और सामान्य प्रसव में बाधा बन रही थीं।
सामान्य परिस्थितियों में इतनी संख्या और आकार की गांठों के साथ डॉक्टर अक्सर हिस्टेरेक्टॉमी (बच्चेदानी निकालने) का सुझाव देते हैं। लेकिन ग्राफिक एरा हॉस्पिटल की टीम ने महिला की मातृत्व की इच्छा को ध्यान में रखते हुए सिजेरियन सेक्शन के साथ ही मायोमेक्टॉमी (फाइब्रॉइड्स निकालने) का फैसला किया।
सर्जरी की चुनौतियां
यह सर्जरी अत्यधिक जोखिम भरी थी क्योंकि:
- गर्भावस्था के दौरान बच्चेदानी में ज्यादा रक्त प्रवाह होता है।
- कई गांठें एक-दूसरे के करीब थीं।
- बच्चे की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए सभी 20 गांठें निकालनी थीं।
डॉक्टर्स की टीम ने सावधानीपूर्वक प्लानिंग के बाद ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान सभी गांठों को सफलतापूर्वक हटाया गया और एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। मां और बच्चा दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
डॉ. दिव्या मिश्रा (स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग) ने बताया, “यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था। हमने मरीज की फर्टिलिटी बचाते हुए सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया। इतनी संख्या में फाइब्रॉइड्स के साथ सफल डिलीवरी दुर्लभ है।”
फाइब्रॉइड्स क्या होते हैं?
यूटेराइन फाइब्रॉइड्स महिलाओं में बहुत आम समस्या है। ये मुख्य रूप से 30-40 वर्ष की आयु वाली महिलाओं को प्रभावित करते हैं। लक्षणों में भारी मासिक धर्म, पेट में दर्द, बार-बार पेशाब आना और गर्भधारण में कठिनाई शामिल हो सकती है। गर्भावस्था में फाइब्रॉइड्स होने पर समय से पहले प्रसव, रक्तस्राव या बच्चे की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
ग्राफिक एरा हॉस्पिटल के विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर मामलों में छोटी गांठों का इलाज दवाओं से किया जा सकता है, लेकिन बड़ी या कई संख्या वाली गांठों में सर्जरी जरूरी हो जाती है।
ग्राफिक एरा हॉस्पिटल की उपलब्धि
यह सफलता ग्राफिक एरा हॉस्पिटल की उन्नत सुविधाओं और अनुभवी डॉक्टर्स की टीम का नतीजा है। अस्पताल में लेटेस्ट लैप्रोस्कोपिक और ओपन सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल ने कई हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी केस सफलतापूर्वक हैंडल किए हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि वे हमेशा मरीज की फर्टिलिटी और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
विशेषज्ञों की राय
देश के अन्य स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि सीजेरियन मायोमेक्टॉमी (प्रसव के समय फाइब्रॉइड्स निकालना) एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें खून की कमी, संक्रमण और समय से पहले प्रसव का खतरा रहता है। ग्राफिक एरा टीम द्वारा किए गए इस केस को मेडिकल जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरीज की कहानी
मरीज ने अस्पताल को धन्यवाद देते हुए बताया कि उन्हें कई अस्पतालों ने हिस्टेरेक्टॉमी का सुझाव दिया था, लेकिन ग्राफिक एरा के डॉक्टर्स ने उन्हें मां बनने का मौका दिया। अब दोनों मां और बच्चा स्वस्थ हैं।
सलाह महिलाओं के लिए
- गर्भधारण से पहले अल्ट्रासाउंड जांच जरूर कराएं।
- यदि फाइब्रॉइड्स का पता चले तो अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
- समय पर इलाज से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
ग्राफिक एरा हॉस्पिटल का यह केस उत्तराखंड के मेडिकल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह घटना दिखाती है कि उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और कुशल डॉक्टर्स की मदद से सबसे जटिल केस भी सफलतापूर्वक संभाले जा सकते हैं।


