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रुद्रप्रयाग/चमोली (8 अप्रैल 2026): उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले 48 घंटों से जारी भारी बर्फबारी ने चारधाम यात्रा की तैयारियों के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है। विशेष रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है, जिससे पैदल मार्गों और मंदिर परिसरों में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
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युद्ध स्तर पर बर्फ कटान जारी
- 4 फीट तक जमी बर्फ: केदारनाथ धाम और बेस कैंप लिनचोली के आसपास 3 से 4 फीट तक ताजी बर्फ जमी है। वहीं बद्रीनाथ धाम में भी भारी हिमपात हुआ है।
- मजदूरों और मशीनों का मोर्चा: कड़ाके की ठंड के बावजूद बीआरओ (BRO) और डीडीएमए (DDMA) के सैकड़ों मजदूर बर्फ काटने के काम में जुटे हैं। पैदल मार्ग को खोलने के लिए छेनी-हथौड़े और फावड़ों के साथ मशीनों का सहारा लिया जा रहा है।
- जेसीबी (JCB) की तैनाती: यात्रा मार्ग के संवेदनशील क्षेत्रों और लैंडस्लाइड (भूस्खलन) जोन में प्रशासन ने एहतियातन जेसीबी और भारी मशीनों को तैनात किया है। फाटा, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और बद्रीनाथ हाईवे पर लामबगड़ जैसे क्षेत्रों में मशीनों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि रास्ता बंद होते ही तुरंत खोला जा सके।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
- डेंजर जोन की मॉनिटरिंग: केदारनाथ पैदल मार्ग पर ‘भैरव गदेरा’ और ‘कुबेर गदेरा’ जैसे ग्लेशियर क्षेत्रों में विशेष टीम तैनात की गई है।
- यात्री शेल्टर का निर्माण: बर्फबारी और बारिश से बचने के लिए मार्ग में नए रेन शेल्टर और विश्राम गृहों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।
- हेल्थ चेकअप अनिवार्य: इस बार प्रशासन ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड को देखते हुए यात्रियों के लिए ‘हेल्थ स्क्रीनिंग’ की व्यवस्था को और सख्त किया है।
चारधाम यात्रा की तिथि (स्मरण रहे)
बद्रीनाथ धाम के कपाट 26 अप्रैल 2026 को और केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल 2026 को खुलने प्रस्तावित हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि 20 अप्रैल तक सभी मुख्य मार्गों और धामों में बिजली, पानी व संचार की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाए।


