
देहरादून/चमोली: उत्तराखंड में पारा चढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया है। पिछले 48 घंटों में राज्य भर से 60 से अधिक ‘फायर अलर्ट’ मिलने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के मुखिया ने सभी फील्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं और पूरी फोर्स को 24×7 हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
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आंकड़ों में भयावहता वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 नवंबर 2025 से 16 अप्रैल 2026 तक राज्य में वनाग्नि की 160 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 100 हेक्टेयर से अधिक वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। चमोली रेंज के लासी और चूलाकोट सिमली क्षेत्रों के साथ-साथ पौड़ी-श्रीनगर मार्ग पर भी भीषण आग लगने की खबरें हैं, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
वन विभाग का ‘मास्टरप्लान’ जंगलों को बचाने के लिए शासन ने जिला स्तर पर विशेष टीमों की तैनाती की है।
- मास्टर कंट्रोल रूम: सभी संवेदनशील रूटों पर मास्टर कंट्रोल रूम के जरिए सैटेलाइट मैपिंग से नजर रखी जा रही है।
- पिरूल खरीद केंद्र: बागेश्वर सहित कई जिलों में 23 पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) खरीद केंद्र खोले गए हैं, ताकि जंगलों से ईंधन कम किया जा सके और स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल सके।
- विजिबिलिटी पर असर: पौड़ी के पास आग और धुएं के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो गई है, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 3-4 दिनों में तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस की और वृद्धि होने की संभावना जताई है। हालांकि, उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी का अनुमान है, लेकिन मैदानी और मध्य पहाड़ी इलाकों में शुष्क मौसम आग की घटनाओं को और हवा दे सकता है।


