
देहरादून: उत्तराखंड के आराध्य देव और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जाने वाले चितई गोल्ज्यू महाराज का दिव्य रथ आज पहली बार प्रदेश की राजधानी देहरादून पहुंचा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उतर आए। गोल्ज्यू महाराज के रथ के आगमन से पूरी दून घाटी भक्तिमय हो गई है।
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पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ स्वागत देहरादून की सीमा में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं ने गोल्ज्यू महाराज के रथ पर पुष्प वर्षा की। कुमाऊं से आए इस दिव्य रथ का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल-दमाऊ और शंखध्वनि के साथ किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक ‘पिछावड़ा’ पहनकर मंगल गान किए और मंगल कलश के साथ रथ की अगुवाई की।
पहली बार राजधानी पहुंचे गोल्ज्यू महाराज मान्यता है कि अल्मोड़ा के चितई मंदिर स्थित गोल्ज्यू महाराज भक्तों को शीघ्र न्याय दिलाते हैं। यह पहली बार है जब गोल्ज्यू महाराज का डोला या रथ यात्रा विधिवत रूप से देहरादून पहुंची है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में खुशहाली और शांति की कामना करना है।
जगह-जगह लगाए गए भंडारे रथ यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह जलपान और भंडारे की व्यवस्था की थी। दर्शनों के लिए मंदिर समितियों और सामाजिक संगठनों ने भारी उत्साह दिखाया। गोल्ज्यू महाराज के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जहाँ लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचे थे।
श्रद्धा का सैलाब राजधानी के प्रमुख चौराहों से होते हुए यह रथ यात्रा गुजरी, जहाँ ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। भक्तों का कहना है कि गोल्ज्यू महाराज का देहरादून आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। शाम को विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिरकत की।


