उत्तराखंड पर्यटन में नया अध्याय: ऋषिकेश में सी-प्लेन का सफल ट्रायल, अब मिनटों में होगा चारधाम का सफर

उत्तराखंड पर्यटन में नया अध्याय: ऋषिकेश में सी-प्लेन का सफल ट्रायल, अब मिनटों में होगा चारधाम का सफर
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ऋषिकेश/देहरादून, 8 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के पर्यटन और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। ऋषिकेश स्थित गंगा बैराज पर सी-प्लेन (Sea-plane) का पहला सफल ट्रायल लैंडिंग और टेक-ऑफ किया गया। इस सफल परीक्षण के साथ ही देवभूमि में एडवेंचर टूरिज्म और धार्मिक यात्रा के एक नए युग की शुरुआत हो गई है।

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हवाई कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हुए इस ट्रायल ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों में सी-प्लेन एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह सेवा शुरू होने से चारधाम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से ऋषिकेश से बद्रीनाथ या केदारनाथ के नजदीकी केंद्रों तक पहुँचने में कई घंटे लगते हैं, लेकिन सी-प्लेन की मदद से यह दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी।

इन क्षेत्रों में विस्तार की है योजना

सरकार की योजना केवल ऋषिकेश तक सीमित नहीं है। नागरिक उड्डयन विभाग के अनुसार:

  • टिहरी झील: ऋषिकेश के बाद टिहरी की विशाल झील को सी-प्लेन का मुख्य हब बनाने की तैयारी है।
  • नैनीताल और भीमताल: कुमाऊं मंडल में नैनीताल और आसपास की झीलों में भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लैंडिंग साइट्स विकसित की जाएंगी।
  • अनेक जल निकाय: राज्य के अन्य बड़े जलाशयों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने पर विचार चल रहा है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि सी-प्लेन सेवा न केवल तीर्थयात्रियों के लिए मददगार होगी, बल्कि यह दुनिया भर के ‘एडवेंचर टूरिज्म’ प्रेमियों को भी आकर्षित करेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की जीडीपी (GDP) में पर्यटन का योगदान बढ़ेगा। हवाई कनेक्टिविटी आसान होने से उन बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों को भी मदद मिलेगी, जो कठिन सड़क मार्ग के कारण यात्रा करने से कतराते थे।

सुरक्षा और पर्यावरण का रखा गया ध्यान

ट्रायल के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया। विशेषज्ञों की टीम ने गंगा के जलस्तर, बहाव की गति और आसपास के वातावरण का गहन अध्ययन किया। सरकार का कहना है कि सी-प्लेन के संचालन में पर्यावरण और गंगा की निर्मलता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

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