उत्तराखंड में डिजिटल क्रांति: आज से ‘स्वगणना’ (Census 2026) अभियान का आगाज़

उत्तराखंड में डिजिटल क्रांति: आज से ‘स्वगणना’ (Census 2026) अभियान का आगाज़
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देहरादून, 10 अप्रैल 2026: उत्तराखंड राज्य ने आज देश में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। 2026 की जनगणना (Census 2026) के लिए राज्य में आज से ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) अभियान आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जो इस आधुनिक प्रक्रिया को लागू कर रहे हैं।

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क्या है ‘स्वगणना’ और यह कैसे काम करती है?

पारंपरिक रूप से जनगणना प्रगणकों (Enumerators) के घर-घर जाने पर आधारित होती है, लेकिन ‘स्वगणना’ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की सुविधा देती है। आज से, उत्तराखंड के सभी नागरिक केंद्र सरकार के आधिकारिक जनगणना पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से लॉग-इन कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में नागरिकों को कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे। इन सवालों के माध्यम से नागरिक अपने और अपने परिवार के बारे में विस्तृत जानकारी, जैसे:

  • नाम और व्यक्तिगत विवरण
  • बोली जाने वाली भाषाएँ और मातृभाषा
  • शिक्षा और व्यवसाय
  • आवास की स्थिति और उपलब्ध सुविधाएँ
  • धार्मिक और सामाजिक विवरण

नागरिक अपनी सुविधानुसार, अपने घर पर बैठकर ही इन जानकारियों को ऑनलाइन फॉर्म में भर सकते हैं।

इसके लाभ और महत्व

  1. सटीकता और चयन की स्वतंत्रता: ‘स्वगणना’ का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह डेटा की सटीकता को बढ़ाता है। नागरिक स्वयं अपने विवरण, विशेषकर नाम और भाषा (जो कि अक्सर प्रगणकों द्वारा गलत दर्ज कर ली जाती है) को सही-सही दर्ज कर सकते हैं। यह व्यक्तिगत विवरणों के सटीक चयन में सहायक होगी।
  2. समय और संसाधन की बचत: यह प्रक्रिया घर-घर जाने की आवश्यकता को कम करती है, जिससे प्रगणकों का समय और सरकारी संसाधन बचते हैं। नागरिक भी अपनी सुविधा के अनुसार जानकारी भर सकते हैं।
  3. कोविड के बाद की दुनिया में सुरक्षा: हालाँकि महामारी अब नियंत्रण में है, लेकिन डिजिटल प्रक्रियाएँ शारीरिक संपर्क को कम कर सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
  4. बेहतर नीति निर्माण: सटीक और समय पर प्राप्त डेटा से सरकार को उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के अनुरूप बेहतर विकास नीतियां और योजनाएँ बनाने में मदद मिलेगी।

सरकारी अपील और सहायता

उत्तराखंड के मुख्य सचिव और जनगणना निदेशक ने सभी नागरिकों से इस डिजिटल अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा, “‘स्वगणना’ न केवल एक नागरिक का कर्तव्य है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का एक तरीका भी है कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे। हम सभी से आग्रह करते हैं कि वे इस आसान और सुरक्षित प्रक्रिया का हिस्सा बनें।”

जिन नागरिकों को इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है या जिन्हें फॉर्म भरने में कठिनाई हो रही है, उनके लिए सरकार ने निम्नलिखित व्यवस्थाएं की हैं:

  • सभी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और ई-सेवा केंद्रों पर मुफ्त में ‘स्वगणना’ फॉर्म भरने की सुविधा उपलब्ध होगी।
  • सहायता के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए ब्लॉक स्तर पर शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से राज्य के अधिकांश नागरिक डिजिटल रूप से जनगणना में भाग लेंगे और एक ‘डिजिटल उत्तराखंड’ के निर्माण में योगदान देंगे। अभियान की अवधि आगामी कुछ हफ्तों तक चलेगी।

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