
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम राज्य में “समान शिक्षा प्रणाली” लागू करने और मुस्लिम समुदाय के बच्चों को आधुनिक शिक्षा (Modern Education) से जोड़ने के लिए उठाया गया है।
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1. बोर्ड समाप्ति का कारण (छात्र संख्या में गिरावट)
सरकार की जांच और हालिया रिपोर्ट्स में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे:
- छात्रों की अनुपस्थिति: देहरादून सहित पूरे राज्य के कई मदरसों में छात्र संख्या लगभग शून्य हो चुकी थी।
- रुझान में कमी: अभिभावक अब बच्चों को पारंपरिक मदरसा शिक्षा के बजाय स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं और आधुनिक नौकरियों के लिए तैयार हो सकें।
- पारदर्शिता का अभाव: कई मदरसे केवल कागजों पर चल रहे थे, जिन्हें बंद करना अनिवार्य हो गया था।
2. उत्तराखंड बोर्ड (UBSE) से संबद्धता की अनिवार्यता
1 जुलाई 2026 के बाद, राज्य में कोई भी मदरसा स्वतंत्र ‘मदरसा बोर्ड’ के तहत काम नहीं करेगा।
- अनिवार्य पाठ्यक्रम: अब इन मदरसों को NCERT आधारित पाठ्यक्रम अपनाना होगा।
- समान परीक्षा: अब मदरसों के छात्रों को भी वही बोर्ड परीक्षा देनी होगी जो उत्तराखंड बोर्ड के अन्य छात्र देते हैं।
- मान्यता के मानक: मदरसों को अब उत्तराखंड बोर्ड के कड़े मानकों (जैसे बिल्डिंग, खेल का मैदान, योग्य शिक्षक) को पूरा करना होगा, तभी उन्हें मान्यता मिलेगी।
3. धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे धार्मिक शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे आधुनिक विषयों के साथ संतुलित करना होगा:
- मदरसों में अब गणित, विज्ञान, कंप्यूटर और अंग्रेजी जैसे विषयों को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा।
- जो मदरसे इन नियमों को नहीं मानेंगे, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी और उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता (Grant) रोक दी जाएगी।
4. शिक्षकों और छात्रों पर प्रभाव
- शिक्षक पात्रता: अब मदरसा शिक्षकों के लिए भी पात्रता मानदंड (जैसे TET/B.Ed) अधिक सख्त किए जा सकते हैं ताकि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
- छात्रों का भविष्य: छात्रों के पास अब ऐसी मार्कशीट होगी जो पूरे देश में मान्य होगी, जिससे उन्हें कॉलेजों और सरकारी नौकरियों में आवेदन करने में आसानी होगी।
5. वक्फ बोर्ड की भूमिका
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी पहले ही “मॉडल मदरसों” की वकालत की थी। सरकार के इस फैसले से अब वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाले मदरसों में भी ड्रेस कोड और स्मार्ट क्लासरूम जैसी व्यवस्थाएं लागू होने की संभावना है।
चुनौतियां और विवाद
इस फैसले का कुछ धार्मिक संगठनों और मदरसा संचालकों ने विरोध भी शुरू किया है। उनका तर्क है कि इससे मदरसों की स्वायत्तता (Autonomy) और धार्मिक पहचान प्रभावित होगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह निर्णय केवल छात्रों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।


