देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में चल रही योजनाओं और अभियानों की समीक्षा की गई। बैठक में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स समाज और युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसे रोकना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है।
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मुख्यमंत्री धामी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए सीमावर्ती जिलों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स तस्करों और अवैध कारोबारियों पर कड़ी नजर रखी जाए और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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बैठक में शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए कि स्कूलों और कॉलेजों में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम लगातार चलाए जाएं। छात्रों को ड्रग्स के दुष्प्रभाव और कानूनी परिणामों की जानकारी दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
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स्वास्थ्य विभाग को नशा मुक्ति केंद्रों को और अधिक सशक्त करने और काउंसलिंग सेवाओं को बढ़ाने के लिए निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने पर बल दिया गया।
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बैठक के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने सभी अधिकारियों से कहा कि “ड्रग-फ्री उत्तराखंड” केवल सरकारी कार्यक्रम न होकर सामाजिक आंदोलन बने। इसके लिए जनसहभागिता, सामाजिक संगठनों और मीडिया का सहयोग भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और समाज मिलकर काम करें तो उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकता है।