राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंगोत्री क्षेत्र में हो रहे अनियंत्रित और अवैध निर्माण कार्यों पर स्वतः संज्ञान लिया है। NGT ने इसे पर्यावरणीय और सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
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गंगोत्री के आसपास के क्षेत्रों में कई होमस्टे, होटल और निजी भवन बगैर किसी पर्यावरणीय मंजूरी के बनाए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन निर्माणों में से कई बाढ़ संभावित क्षेत्रों और नदी किनारे के अति संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं।
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NGT ने उत्तराखंड सरकार, उत्तरकाशी जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को नोटिस भेजते हुए जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि इन निर्माण कार्यों की अनुमति कैसे दी गई और क्या इनके लिए जरूरी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) कराया गया था।
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अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को 27 नवम्बर 2025 से पहले अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही NGT ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो निर्माण कार्यों पर रोक और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
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इस कार्रवाई के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। पर्यावरणविदों ने NGT के कदम का स्वागत किया है और कहा कि इस तरह की कार्रवाई हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए बेहद ज़रूरी है।
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