देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों की जेब पर नवंबर महीने से अतिरिक्त भार पड़ने वाला है। राज्य सरकार ने दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले यात्री वाहनों (सैलानियों के वाहनों) पर प्रवेश शुल्क (Entry Fee) बढ़ाने का फैसला किया है। यह नया नियम नवंबर 2025 से लागू होने की संभावना है।
परिवहन विभाग द्वारा शुल्क में की गई यह वृद्धि विशेष रूप से पर्यटन को ध्यान में रखकर की गई है ताकि राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके। अभी तक बाहरी राज्यों के वाहनों से लिया जाने वाला शुल्क तुलनात्मक रूप से कम था, लेकिन अब इसमें महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है।
शुल्क का विवरण: फिलहाल, यह जानकारी सार्वजनिक हुई है कि शुल्क में 15% से 20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है (सटीक प्रतिशत आधिकारिक अधिसूचना के बाद पता चलेगा)। यह शुल्क राज्य की सीमा में प्रवेश करते समय या निर्धारित चेक पोस्ट पर देना होगा। इस वृद्धि का सीधा असर उन लाखों पर्यटकों पर पड़ेगा जो हर साल अपनी निजी गाड़ियों या टैक्सी से चार धाम यात्रा, नैनीताल, मसूरी, और अन्य पर्यटन स्थलों पर आते हैं।
सरकारी उद्देश्य: परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस शुल्क वृद्धि का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व को बढ़ाना और उत्तराखंड के अंदर संचालित होने वाले स्थानीय परिवहन व्यवसायों को बढ़ावा देना है। साथ ही, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना भी एक लक्ष्य हो सकता है, जिससे सड़कों पर भीड़भाड़ कम हो।
इस फैसले पर टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ ऑपरेटर्स का मानना है कि इससे पर्यटन थोड़ा महंगा हो जाएगा, जबकि कुछ ने कहा कि यह वृद्धि राज्य के बुनियादी ढांचे को सुधारने में मदद करेगी। सरकार इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है।
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