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गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज: देहरादून की शान, ‘रियल हीरोज’ की फैक्ट्री जो वजूद की जंग लड़ रही है

गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज (GMIC) – न सिर्फ 100 साल पुराना संस्थान है, बल्कि गोरखा योद्धाओं की विरासत को संजोए रखने वाला एक जीवंत प्रतीक। आज ये ‘रियल हीरोज’ तैयार कर रहा है, लेकिन जमीन के लीज खत्म होने की चुनौती से जूझ रहा। आइए, इसकी पूरी कहानी फैक्ट्स, इतिहास और ताजा अपडेट्स के साथ जानते हैं। जानकारी Times of India, Garhwal Post और X पोस्ट्स से ली गई है।

कॉलेज का गौरवशाली इतिहास: ब्रिटिश काल से ‘योद्धा फैक्ट्री’ तक

  • स्थापना और उद्देश्य: 1925 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी ने गोरखा अधिकारियों और सैनिकों के बच्चों के लिए शुरू किया। देहरादून के गढ़ी कैंट में डिफेंस एस्टेट डिपार्टमेंट ने 90 साल की लीज पर जमीन दी। शुरू में गोरखा ट्रेनिंग सेंटर्स (GTCs) के बच्चों के लिए था, जो 1977 तक यहां रहे।
  • खेलों में गोल्डन एरा: फुटबॉल का गढ़! यहां से निकले श्याम थापा (इंटरनेशनल फुटबॉलर, ‘क्विकसिल्वर’ के नाम से मशहूर) और अमर बहादुर गुरुंग जैसे दिग्गज। बॉक्सिंग में ओलंपियन पदम बहादुर मल्ल (1951 एशियन गेम्स में भारत का पहला गोल्ड मेडल)। 1970s में सबरोतो कप में शानदार प्रदर्शन।
  • वीर सपूतों की विरासत: शहीद मेजर दुर्गा मल्ल – INA के पहले गोरखा सैनिक, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में जान दी। गोरखा रेजिमेंट के कई PVC (परम वीर चक्र) विजेता जैसे मेजर धन सिंह थापा (1962 युद्ध) और कैप्टन मनोज पांडे (कारगिल 1999) का कनेक्शन। कॉलेज ने आर्मी ऑफिसर्स, एथलीट्स और लीडर्स तैयार किए – यही ‘रियल हीरोज’ की फैक्ट्री!

आज की चुनौती: वजूद की लड़ाई

  • जमीन का संकट: 90 साल की लीज 2015 में खत्म हो गई। डिफेंस डिपार्टमेंट ने 2021 में एविक्शन नोटिस जारी किया, जिसके बाद कॉलेज सर्वाइवल मोड में। छात्र संख्या घटी (1977 में GTCs शिफ्ट होने से), लेकिन ये सभी कम्युनिटी के बच्चों को एडमिट करता है – गोरखा स्पिरिट के साथ इंक्लूसिव।
  • प्रिंसिपल की अपील: 2021 में प्रिंसिपल ने कहा, “ये सिर्फ स्कूल नहीं, गोरखा इतिहास का हिस्सा। इसे बचाओ!” TOI रिपोर्ट में बताया गया कि ये संस्थान अनुशासन, खेल और देशभक्ति सिखाता रहा।

ताजा अपडेट्स: उम्मीद की किरणें (2025)

  • हरेला उत्सव (जुलाई 2025): CM पुष्कर सिंह धामी ने GMIC में ‘हरेला मनाओ, धरती मां का ऋण चुकाओ’ थीम पर पौधारोपण किया। रुद्राक्ष का पौधा रोपा, 5 लाख पौधों का लक्ष्य। ये इवेंट पर्यावरण और संस्कृति को जोड़ता है।
  • बॉक्सिंग टूर्नामेंट (मार्च 2025): मंत्री गणेश जोशी ने ‘ऑल इंडिया शहीद लेफ्टिनेंट गौतम बॉक्सिंग टूर्नामेंट’ का उद्घाटन किया। 158 खिलाड़ी (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स से)। युवाओं में अनुशासन और स्पोर्ट्स स्पिरिट बढ़ाने वाला।
  • सेवा मुहिम (अक्टूबर 2025): X पर #SaveGMIC ट्रेंडिंग। यूजर @vilayati5555 ने वीडियो शेयर कर कहा, “देहरादून की शान, इसे बचाओ!” लोकल लीडर्स जैसे @Anoopnautiyal1 को टैग।

क्यों है ये कॉलेज खास?

GMIC सिर्फ पढ़ाई का जगह नहीं – गोरखा ब्रिगेड की विरासत (जिसका मोटो ‘बेटर टू डाई दैन बी अ काउअर्ड’) को जिंदा रखता है। यहां से निकले हीरोज ने 1814-16 के एंग्लो-गोरखा वॉर से लेकर कारगिल तक देश की सेवा की। आज चुनौतियां हैं, लेकिन कम्युनिटी और गवर्नमेंट सपोर्ट से उम्मीद बंधी है।

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