
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी ताजा ‘साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट’ रिपोर्ट (अप्रैल 2026) में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण साझा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व (West Asia) में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की विकास दर 6.6% रहने का अनुमान है।
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रिपोर्ट की मुख्य बातें:
- अनुमान में बढ़ोतरी: विश्व बैंक ने भारत के पिछले विकास अनुमान (6.3%) को 30 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर अब 6.6% कर दिया है। यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।
- विकास का आधार: भारत की इस मजबूती के पीछे मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश और सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार को मुख्य कारण बताया गया है।
- चुनौतियां: रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि खाड़ी देशों में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा, वैश्विक मांग में कमी से निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।
- क्षेत्रीय प्रदर्शन: दक्षिण एशिया की कुल विकास दर 2026 में 6.3% रहने की उम्मीद है, जिसमें भारत सबसे बड़ा और प्रमुख चालक (Driver) बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय:
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के उपाध्यक्ष जोहान्स जट ने कहा कि भारत ने अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला है। यदि भारत अपने व्यापारिक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखता है, तो वह 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ सकता है।
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