
झूलाघाट/धारचूला: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। नेपाल की नवगठित सरकार (बालेन शाह सरकार) द्वारा 50 साल पुराने भंसार नियमों को अचानक सख्ती से लागू करने के कारण धारचूला और झूलाघाट के व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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क्या है नया नियम?
नेपाल प्रशासन ने अब भारत से खरीदे गए 100 रुपये से अधिक के किसी भी सामान पर सीमा शुल्क (Bhansar) अनिवार्य कर दिया है। पहले छोटे-मोटे घरेलू सामान की आवाजाही पर छूट रहती थी, लेकिन अब चीनी, दाल, कपड़े और यहाँ तक कि दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी भारी टैक्स वसूला जा रहा है। झूलाघाट और धारचूला में तैनात नेपाल के सशस्त्र प्रहरी बल (APF) की संख्या भी दोगुनी कर दी गई है, जिससे चेकिंग के नाम पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
रोटी-बेटी के रिश्तों पर असर
सीमावर्ती निवासियों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ का संबंध है। लोग शादियों और रोजमर्रा के सामान के लिए एक-दूसरे के बाजारों पर निर्भर रहते हैं। सख्ती का आलम यह है कि शादी के लिए खरीदे गए कपड़ों और उपहारों पर भी भारी शुल्क मांगा जा रहा है। नियमों के उल्लंघन पर सामान जब्त कर उसकी नीलामी की जा रही है, जिससे नेपाली नागरिक अपने ही खरीदे सामान को दोबारा नीलामी में खरीदने को मजबूर हैं।
स्थानीय व्यापारियों की चिंता
झूलाघाट और धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्षों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सीमावर्ती भारतीय बाजार पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। नेपाल की इस सख्ती के बाद नेपाली ग्राहकों की संख्या में 70% से 80% तक की गिरावट आई है। व्यापारियों ने इस मामले में भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि व्यापार और मानवीय संबंधों को बचाया जा सके।


