
उत्तराखंड और देश के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही, इसमें शामिल एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (वन्यजीव गलियारा) भी अब पूरी तरह से चालू हो गया है। विज्ञान, पर्यावरण और आधुनिक इंजीनियरिंग के अनूठे संगम के रूप में यह प्रोजेक्ट पूरी दुनिया में मिसाल कायम कर रहा है।
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राजाजी नेशनल पार्क के लिए वरदान यह कॉरिडोर मुख्य रूप से राजाजी नेशनल पार्क के वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सालों से पार्क के बीच से गुजरने वाली सड़क या रेल लाइन पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण हाथियों और अन्य जानवरों की दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती थीं। इस कॉरिडोर के बन जाने से अब जानवरों के लिए पार्क के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना सुरक्षित हो गया है।
12 किमी का एलिवेटेड हिस्सा (Elevated Section) इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात एक्सप्रेसवे का 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड हिस्सा है। यह सड़क जमीन से काफी ऊपर उठाई गई है, जिससे नीचे का पूरा जंगल जानवरों की आवाजाही के लिए खुला रहता है। नेशनल पार्क के संवदेनशील हिस्सों में यह फ्लाईओवर बनाया गया है ताकि हाथी, बाघ, गुलदार और अन्य वन्यजीव बिना किसी डर और खतरे के सड़क के नीचे से प्राकृतिक वातावरण में गुजर सकें।
एडवांस सेंसर तकनीक से लैस (Advanced Sensor Technology) यह कॉरिडोर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण भी है। पूरे 12 किमी के हिस्से में जानवरों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए एडवांस सेंसर तकनीक और नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल किया गया है।
- सेंसर का काम: जब भी कोई बड़ा जानवर सड़क के नीचे से गुजरता है, सेंसर उसे डिटेक्ट कर लेते हैं।
- फायदा: यह डेटा वैज्ञानिकों और वन विभाग को जानवरों की आदतों, उनके कॉरिडोर इस्तेमाल करने के पैटर्न को समझने में मदद करेगा। साथ ही, अगर कभी कोई जानवर गलती से सड़क पर आ जाता है, तो सेंसर तुरंत अलर्ट भेज देंगे ताकि हादसे को टाला जा सके।
विकास और पर्यावरण का संतुलन प्रधान मंत्री मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा कि यह एक्सप्रेसवे साबित करता है कि देश का विकास (Economy) और पर्यावरण (Ecology) दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। दिल्ली से देहरादून का सफर आसान होने के साथ-साथ अब राजाजी नेशनल पार्क के वन्यजीवों का जीवन भी सुरक्षित हो गया है। यह प्रोजेक्ट आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पर्यावरण विरासत के रूप में देखा जा रहा है।


