हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अवैध मदरसों पर राहत, लेकिन शर्तों के साथ

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अहम आदेश सुनाया जिसमें कहा गया कि राज्य में जिन मदरसों को “अवैध” मानकर सील किया गया है, उन्हें विशेष शर्तों पर डी-सील किया जा सकता है। अदालत ने साफ किया कि यदि कोई संस्था ‘मदरसा’ नाम का उपयोग करते हुए शिक्षा गतिविधि चलाती है और बिना मान्यता के कार्यरत है, तो वह गैरकानूनी मानी जाएगी।
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अदालत ने कहा कि यदि ऐसे मदरसे अपने शैक्षिक कार्य पूरी तरह से बंद कर दें और “मदरसा” शब्द का इस्तेमाल भी न करें, तो उन्हें पुनः खोला जा सकता है। यानी संस्था धार्मिक गतिविधियाँ या नमाज़ जैसे आयोजन जारी रख सकती है, लेकिन वहां बच्चों को औपचारिक शिक्षा देने की अनुमति नहीं होगी।
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इस फैसले का असर सीधे उन मदरसों पर पड़ेगा जिन्हें हाल ही में उत्तराखंड प्रशासन ने बिना मान्यता संचालित करने के कारण बंद कर दिया था। अब ऐसे मदरसों को दो विकल्प मिलते हैं—या तो वे शिक्षा संबंधी कार्य बंद करें और सिर्फ धार्मिक स्थल के तौर पर चलें, या फिर मान्यता की प्रक्रिया पूरी करके विधिक रूप से शिक्षा दें।
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हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि वह इस आदेश का सख्ती से पालन कराए और यह सुनिश्चित करे कि अवैध रूप से शिक्षा देने वाले मदरसे दोबारा शुरू न हो सकें। साथ ही, सरकार को यह भी देखना होगा कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन न हो।
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इस आदेश के बाद उत्तराखंड में मदरसा प्रबंधन समितियों के बीच हलचल मच गई है। कई प्रबंधकों ने कहा कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करेंगे और कानूनी तरीके से ही आगे बढ़ेंगे। वहीं, शिक्षा विभाग ने भी साफ किया है कि सभी संस्थाओं को नियमानुसार पंजीकरण और मान्यता प्राप्त करनी होगी।
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