देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के चार संवेदनशील जिलों—देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल—में संचालित सभी मदरसों की व्यापक जांच और सत्यापन (Verification) के आदेश दिए हैं। शासन ने यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उठाया है, जिसमें कथित तौर पर बिहार जैसे बाहरी राज्यों से बच्चों को उत्तराखंड के मदरसों में लाए जाने का दावा किया गया था।
इन बिंदुओं पर होगी गहन जांच अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारियों को मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के संबंध में निम्नलिखित पहलुओं की जांच करने को कहा गया है:
- बच्चों का स्रोत: बच्चे मूल रूप से किस राज्य और जिले के निवासी हैं?
- अभिभावकों की सहमति: क्या बच्चों को उनके माता-पिता की लिखित सहमति के बाद लाया गया है?
- नामांकन प्रक्रिया: बच्चों को लाने और प्रवेश दिलाने के लिए कौन से व्यक्ति या संस्थाएं जिम्मेदार हैं?
- पंजीकरण की स्थिति: क्या मदरसा बोर्ड या संबंधित प्राधिकरण के पास सभी छात्रों का सही रिकॉर्ड उपलब्ध है?
सोशल मीडिया वीडियो ने बढ़ाई हलचल हाल ही में विकासनगर (देहरादून) क्षेत्र का एक वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक व्यक्ति से पूछताछ कर रहे थे जो बिहार से बच्चों को मदरसा लाने का दावा कर रहा था। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अन्य राज्यों से बच्चों के ‘मूवमेंट’ और उनके संरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
मदरसा बोर्ड खत्म होने की दहलीज पर यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब उत्तराखंड सरकार पहले ही ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025’ लागू कर चुकी है। इसके तहत 1 जुलाई, 2026 से वर्तमान मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड (UBSE) से संबद्ध होना अनिवार्य होगा। वर्तमान में राज्य में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं, जिनमें से अकेले देहरादून में 30 से अधिक मदरसे बिना पंजीकरण के चलने की खबरें भी सामने आई हैं।




