उत्तराखंड में रोपवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की प्रगति: केदारनाथ-हेमकुंड रोपवे पर MoU, दिल्ली-देहरादून पर नई सुविधाएं

देहरादून, उत्तराखंड: राज्य में पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। केंद्र सरकार की ‘परिवत्माला परियोजना’ के तहत उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें केदारनाथ और हेमकुंड साहिब प्रमुख हैं। हाल ही में इनके लिए नया समझौता (MoU) साइन हुआ है। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए ATM, फूड कोठी, मेडिकल रूम और EV चार्जिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं, जो सफर को और सुरक्षित व आरामदायक बनाएंगी।

रोपवे परियोजनाओं पर तेज प्रगति: 50 प्रोजेक्ट्स में केदारनाथ-हेमकुंड प्रमुख

उत्तराखंड सरकार और केंद्र के संयुक्त प्रयासों से राज्य में रोपवे विकास को गति मिली है। मार्च 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘परिवत्माला परियोजना’ के तहत दो प्रमुख रोपवे मंजूर किए, जिनकी कुल लागत 6,811 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं न केवल तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान करेंगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार भी पैदा करेंगी। राज्य में कुल 50 रोपवे प्रोजेक्ट्स पर काम तेज है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को क्रांतिकारी बदलाव देंगे।

ये परियोजनाएं पर्यावरण-अनुकूल हैं और वन्यजीव संरक्षण के मानकों का पालन करेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “ये प्रोजेक्ट्स उत्तराखंड को पर्यटन हब बनाएंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।”

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: सुविधाओं से लैस, सफर 2.5 घंटे में

दिल्ली से देहरादून तक 210 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे (NH-709B) यात्रा को क्रांतिकारी बदलाव देगा। वर्तमान 250 किमी की दूरी 5-6 घंटे लेती है, जो अब सिर्फ 2.5 घंटे में पूरी हो जाएगी। कुछ सेक्शन पहले से चालू हैं, पूरा प्रोजेक्ट दिसंबर 2025 तक तैयार। NHAI ने अक्षरधाम से उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक तीन पार्किंग साइट्स विकसित करने के लिए बोली आमंत्रित की है (DBOT मॉडल), जो 16 अक्टूबर 2025 तक पूरी होंगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में कहा, “यह एक्सप्रेसवे NCR और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाएगा।”

विकास पर नया समझौता: पर्यटन और रोजगार को बूस्ट

रोपवे के लिए सितंबर 2025 में NHLML के साथ MoU साइन होने से प्रोजेक्ट्स को गति मिली। कुल 50 रोपवे में ये दो प्रमुख हैं, जो साल भर पर्यटन चलाएंगे। एक्सप्रेसवे पर सुविधाओं से यात्रा सुरक्षित होगी। ये परियोजनाएं 36 लाख (केदारनाथ) और 13.9 लाख (हेमकुंड) यात्रियों को सालाना लाभ पहुंचाएंगी।

स्थानीय प्रभाव और भविष्य

ये प्रोजेक्ट्स स्थानीय होटल, ट्रैवल और F&B उद्योग को बढ़ावा देंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि ये सस्टेनेबल हैं। उम्मीद है कि 2031 तक रोपवे चालू होने से उत्तराखंड का पर्यटन दोगुना हो जाएगा।

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