देहरादून

दून को हरा-भरा बनाने की निगम की तैयारी: तीन वर्षीय कार्ययोजना के तहत एक लाख पौधे रोपे गए

देहरादून को उसकी पुरानी हरियाली लौटाने और शहर को प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप से बचाने के लिए नगर निगम ने एक महत्वाकांक्षी तीन-वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के पहले चरण में इस साल शहर भर में लगभग एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह अभियान देहरादून के घटते हरित क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहाँ मानकों के अनुसार 18% के मुकाबले हरियाली अब मात्र 5.98% रह गई है।

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हरेला पर्व से हुई शुरुआत, मुख्यमंत्री ने रोपा एक लाखवां पौधा

इस वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ 16 जुलाई, 2025 को हरेला पर्व के पावन अवसर पर किया गया था, जिसमें पहले ही दिन आईटी पार्क नालापानी रोड पर आंवला, जामुन और बांस जैसी प्रजातियों के 25,000 पौधे रोपे गए। अभियान ने गति पकड़ी और विभिन्न चरणों में शहर के अलग-अलग हिस्सों, पार्कों, सड़कों के किनारे और अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीनों पर वृक्षारोपण किया गया। 13 अगस्त को केदारपुरम में एक योगा पार्क के लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत रुद्राक्ष का पौधा रोपकर इस वर्ष के एक लाखवें पौधे का रोपण किया।

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जनभागीदारी और हरित पखवाड़े ने दी अभियान को गति

इस अभियान की सफलता में जनभागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जुलाई माह में ‘हरित पखवाड़े’ का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत धोरण और कैनाल रोड जैसे क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से 2,000 से अधिक पौधे लगाए गए। नगर निगम ने शहरवासियों, पार्षदों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से इस मुहिम में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। निगम का लक्ष्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना भी है ताकि यह अभियान स्थायी रूप से सफल हो सके।

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विकास की चुनौती: हरियाली बढ़ाने के प्रयासों के बीच कटते पेड़

एक ओर जहाँ नगर निगम शहर को हरा-भरा बनाने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर हजारों पेड़ों की कटाई की योजनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। देहरादून-ऋषिकेश सड़क चौड़ीकरण और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। ऐसे में पर्यावरणविदों और शहर के नागरिकों का कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है। उनकी मांग है कि काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के बदले कई गुना अधिक पौधे लगाए जाएं और उन्हें संरक्षित भी किया जाए, ताकि दून की हरियाली पर विकास की आरी न चले।

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