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भारत का चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) देश की चुनावी प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने वाली संवैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। तब से लेकर आज तक यह संस्था भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। लोकसभा, विधान सभा और राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन इसी आयोग द्वारा किया जाता है।
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ECI एक तीन-सदस्यीय आयोग है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और दो निर्वाचन आयुक्त
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उत्तराखंड में “सतर्कता-हमारी साझा जिम्मेदारी” जैसे अभियानों ने सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई लहर पैदा की है। बीते वर्षों में राज्य सरकार और सतर्कता विभाग ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें हेल्पलाइन 1064, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, और जन-जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य है — जनता को यह भरोसा दिलाना कि शिकायतें अब केवल सुनी नहीं जाएँगी, बल्कि उन पर कार्रवाई भी होगी।
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देहरादून सचिवालय सहित विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में अधिकारियों और
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देहरादून और उत्तराखंड के अन्य शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए हैं। रात के समय सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर नाइट पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क, और पिंक पेट्रोल यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। लेकिन सवाल यह है — क्या ये प्रयास जमीनी स्तर पर उतने ही प्रभावी हैं, जितने काग़ज़ों पर दिखते हैं?
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पुलिस डेटा के अनुसार, देहरादून में रात्री गश्त की संख्या में 30% की वृद्धि हुई है। शहर में अब “CCTV आधारित रूट मॉनिटरिंग” और “कंट्रोल रूम रिस्पॉन्स टीम
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उत्तराखंड, जिसे "देवभूमि" कहा जाता है, अब इको-टूरिज़्म (Eco-Tourism) के क्षेत्र में देशभर में एक नई पहचान बना रहा है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार दोनों को जोड़ने वाली पहलें तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखंड में इको-टूरिज़्म स्थलों की संख्या में 40% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिनमें कॉर्बेट, अस्कोट, नैनीताल, चकराता, और टिहरी झील प्रमुख हैं।
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इको-टूरिज़्म का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्थायी विकास (Sustainable
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उत्तराखंड, जिसे “देवभूमि” कहा जाता है, प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक महत्व का अद्भुत संगम है। राज्य के 13 जिले अपने-अपने भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण एक-दूसरे से बिल्कुल अलग पहचान रखते हैं। आइए जानते हैं, हर जिले की ख़ासियत —
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