2016 के स्टिंग ऑपरेशन मामले में रावत को 23 सितंबर को CBI मुख्यालय में पेश होने को कहा गया।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बहुचर्चित स्टिंग प्रकरण के संबंध में उन्हें 26 सितंबर को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। सीबीआई ने उन्हें यह समन अपनी आवाज का नमूना (वॉइस सैंपल) देने के लिए भेजा है। यह मामला 2016 का है, जब एक स्टिंग ऑपरेशन में हरीश रावत को विधायकों की खरीद-फरोख्त करते हुए दिखाया गया था। हालांकि, हरीश रावत हमेशा से इन आरोपों को खारिज करते आए हैं। #हरीश_रावत #सीबीआई #स्टिंग_ऑपरेशन #उत्तराखंड_राजनीति
लंबे समय बाद CBI को मेरी याद आई – हरीश रावत
क्या है स्टिंग ऑपरेशन का मामला?
यह मामला साल 2016 का है, जब हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। उस समय एक पत्रकार द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में रावत को कथित तौर पर विधायकों को पक्ष में करने के लिए पैसों की पेशकश करते हुए दिखाया गया था। यह स्टिंग तब सामने आया था जब राज्य में राजनीतिक संकट चल रहा था और कांग्रेस सरकार अपनी बहुमत साबित करने की कोशिश कर रही थी। इस स्टिंग के बाद विपक्षी दलों ने हरीश रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। #स्टिंग_प्रकरण #राजनीतिक_विवाद #कांग्रेस #हरीशरावत
जांच में तेजी और कानूनी पहलू
सीबीआई इस मामले की जांच लंबे समय से कर रही है। एजेंसी ने पहले भी इस मामले में कई लोगों से पूछताछ की है और कई दस्तावेज जुटाए हैं। अब वॉइस सैंपल के लिए हरीश रावत को बुलाया जाना इस बात का संकेत है कि सीबीआई इस मामले की जांच को अंतिम रूप देना चाहती है। वॉइस सैंपल का मिलान स्टिंग में रिकॉर्ड की गई आवाज से किया जाएगा, जिससे यह साबित हो सके कि वह आवाज हरीश रावत की है या नहीं। यदि आवाज का मिलान हो जाता है, तो यह जांच में एक महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है। #सीबीआई_जांच #कानूनी_प्रक्रिया #वॉइस_सैंपल #सबूत