उत्तराखंड

बड़ी चिंता: 51 साल के अध्ययन में खुलासा, गंगा को ‘सदानीरा’ बनाने वाले ग्लेशियरों की मोटाई तेजी से घट रही है

देहरादून/उत्तराखंड: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण उत्तराखंड में स्थित ग्लेशियरों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर एक नया और चिंताजनक खुलासा हुआ है। एक हालिया रिपोर्ट, जो 51 साल के विस्तृत डेटा अध्ययन पर आधारित है, में यह बात सामने आई है कि गंगा नदी को वर्ष भर पानी (सदानीरा) उपलब्ध कराने वाले ग्लेशियरों की मोटाई (Thickness) तेजी से घट रही है।

अध्ययन के मुख्य बिंदु: यह अध्ययन मुख्य रूप से गंगा बेसिन के ऊपरी हिस्सों, विशेष रूप से भागीरथी और अलकनंदा क्षेत्र के ग्लेशियरों पर केंद्रित था। लंबे समय तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण इन ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिसके कारण उनकी मोटाई (वॉल्यूम) में काफी कमी आई है।

जल सुरक्षा पर खतरा: ग्लेशियरों का पिघलना शुरुआत में नदियों में जल स्तर बढ़ा सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह गंगा के जल प्रवाह के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। ग्लेशियरों के पूरी तरह पिघल जाने या बहुत सिकुड़ जाने की स्थिति में गंगा नदी का सदानीरा (वर्ष भर बहने वाली) स्वरूप खतरे में पड़ सकता है। यह न केवल उत्तराखंड बल्कि गंगा पर निर्भर उत्तर भारत के विशाल मैदानों में रहने वाली लाखों की आबादी के लिए जल संकट की स्थिति पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट को गंभीर चेतावनी मानते हुए कहा है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ग्लेशियरों को बचाने के लिए ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारकों को नियंत्रित करना और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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