
नरेन्द्रनगर/देहरादून। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया विधि-विधान के साथ शुरू हो गई है। मंगलवार, 7 अप्रैल को टिहरी रियासत की राजधानी नरेन्द्रनगर स्थित राजमहल में ‘गाडू घड़ा’ (तेल कलश) उत्सव आयोजित किया गया। राजमाता माला राज्य लक्ष्मी शाह की उपस्थिति में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के बीच भगवान बदरी विशाल के अभिषेक के लिए तिलों का तेल पिरोया।
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क्या है गाडू घड़ा परंपरा? मान्यता है कि भगवान बदरी विशाल के निर्वाण दर्शन और महाभिशेष के लिए इसी तेल का प्रयोग किया जाता है। डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिधि इस गाडू घड़े को लेकर राजमहल पहुंचे थे। पिरोए गए तेल को कलश में भरकर अब ऋषिकेश के रास्ते योगबदरी पांडुकेश्वर और फिर बदरीनाथ धाम ले जाया जाएगा। यह कलश यात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है।
23 अप्रैल को सुबह 6:15 पर खुलेंगे कपाट इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगी। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। प्रशासन ने यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।


