
देहरादून: राजधानी देहरादून के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, दून अस्पताल (Doon Hospital) से संवेदनहीनता और लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के मुर्दाघर (मोर्चरी) में रखे डीप फ्रीजरों में पिछले चार महीनों से बिजली का करंट दौड़ रहा है। यह स्थिति न केवल वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जानलेवा बनी हुई है, बल्कि शवों के रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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कर्मचारियों में डर का माहौल जांच में यह खुलासा हुआ है कि मोर्चरी के भीतर शवों को सुरक्षित रखने वाले फ्रीजर बॉक्स में अर्थिंग या तकनीकी खराबी के कारण करंट आ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इसकी शिकायत कई बार प्रबंधन से की, लेकिन पिछले 4 महीनों से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। काम के दौरान कर्मचारी डर के साये में रहते हैं, क्योंकि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी मुर्दाघर जैसे संवेदनशील स्थान पर जहां 24 घंटे बिजली की आवश्यकता होती है, वहां इस तरह की तकनीकी खराबी को महीनों तक नजरअंदाज करना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग है। सुरक्षा के लिहाज से यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि यहां न केवल कर्मचारी बल्कि पुलिसकर्मी और मृतकों के परिजन भी पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान आते-जाते रहते हैं।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच की बात कही है। सूत्रों के अनुसार, अब जाकर बिजली विभाग और संबंधित इंजीनियरों को फ्रीजर की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर चार महीने तक प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा था? इस लापरवाही ने अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव के दावों की पोल खोलकर रख दी है।


