नया परिसीमन: उत्तराखंड में विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने के आसार, चुनावी समीकरण बदलेंगे

नया परिसीमन: उत्तराखंड में विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने के आसार, चुनावी समीकरण बदलेंगे
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देहरादून: भारत में साल 2026 के बाद प्रस्तावित नए परिसीमन (Delimitation) को लेकर उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जनसंख्या के ताजा आंकड़ों और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि देवभूमि में विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस बदलाव से न केवल राज्य का राजनीतिक नक्शा बदलेगा, बल्कि सत्ता के समीकरणों में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

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विधानसभा सीटों का आंकड़ा 100 के पार? वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा में 70 निर्वाचित सीटें हैं। जानकारों और सांख्यिकीय अनुमानों के अनुसार, परिसीमन के बाद यह संख्या 90 से 105 के बीच पहुँच सकती है। इसी तरह, लोकसभा सीटों की संख्या भी वर्तमान 5 से बढ़कर 7 या 8 होने की प्रबल संभावना है।

पर्वतीय बनाम मैदानी क्षेत्रों का संतुलन परिसीमन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘पहाड़ का प्रतिनिधित्व’ बचाए रखना है।

  • मैदानी क्षेत्रों का दबदबा: देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में जनसंख्या विस्फोट के कारण यहाँ की सीटों में भारी बढ़ोतरी तय है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों की चिंता: पलायन के कारण कई पहाड़ी जिलों की जनसंख्या स्थिर या कम हुई है। यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो सत्ता का केंद्र पूरी तरह मैदानों की ओर खिसक सकता है।
  • भौगोलिक आधार की मांग: उत्तराखंड के क्षेत्रीय दल और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि हिमालयी राज्यों के लिए जनसंख्या के साथ-साथ ‘विषम भूगोल’ और ‘क्षेत्रफल’ को भी मानक बनाया जाए।

बदलेंगे चुनावी समीकरण सीटों की संख्या बढ़ने से कई मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों का भूगोल बदल जाएगा।

  1. नए चेहरे: विधानसभा क्षेत्र छोटे होने से नए स्थानीय नेताओं को उभरने का मौका मिलेगा।
  2. जातीय और क्षेत्रीय समीकरण: ठाकुर, ब्राह्मण और दलित मतदाताओं के वर्चस्व वाली सीटों का गणित नए सिरे से लिखा जाएगा।
  3. आरक्षित सीटें: एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या और स्थिति में भी बदलाव संभव है।

निर्वाचन आयोग की तैयारी राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए प्रारंभिक डेटा जुटाना शुरू कर दिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मैपिंग (Mapping) के कार्यों को इसी बड़े परिप्रेक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा गठित होने वाला परिसीमन आयोग 2026 की जनगणना या उपलब्ध डेटा के आधार पर अंतिम निर्णय लेगा।

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