उत्तराखंडदेहरादून

Uttarakhand: नगर निकायों में प्रभारी ईओ की नियुक्तियों पर उठे सवाल, विभाग के पास नहीं चयन का स्पष्ट पैमाना

उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग द्वारा नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों (ईओ) की नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि विभाग ने क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक और लेखा कर्मचारियों को किस आधार पर प्रभारी ईओ का दायित्व सौंपा, इसका कोई स्पष्ट मानदंड सामने नहीं आया है। वहीं, इस संबंध में जवाब देने से विभागीय अधिकारी भी बचते नजर आ रहे हैं। हाल ही में शहरी विकास विभाग ने नौ नियमित अधिशासी अधिकारियों को नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त के रूप में तैनात किया था। इसके साथ ही कुल 18 कर्मचारियों, जिनमें क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक और अकाउंट संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं, को विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले के बाद विभाग की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि यदि नियुक्तियों का आधार वरिष्ठता था, तो कई ऐसे कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया है जो अपने संवर्ग की वरिष्ठता सूची में काफी नीचे हैं। जानकारी के अनुसार, एक प्रभारी ईओ वरिष्ठता सूची में 177वें स्थान पर हैं, जबकि एक अन्य अपने संवर्ग में 56वें स्थान पर हैं। दूसरी ओर कई वरिष्ठ सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक और अन्य कर्मचारी अब भी अपने मूल पदों पर कार्यरत हैं। इसी को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभाग ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के बजाय 'पिक एंड चूज' की नीति के तहत मनमाने तरीके से नियुक्तियां की हैं। कर्मचारियों और संबंधित वर्गों में यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर 18 प्रभारी ईओ के चयन का मानदंड क्या था और किन मापदंडों के आधार पर इन अधिकारियों का चयन किया गया। इस मामले में शहरी विकास विभाग के अपर सचिव एवं निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी से पक्ष जानने के लिए फोन, संदेश और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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