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चौखुटिया/हल्द्वानी | 14 दिसंबर 2025
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उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण के मुद्दे पर सरकार की कथित उदासीनता और लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के विरोध में स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति ने बड़े जनआंदोलन की घोषणा की है। समिति द्वारा आगामी 25 दिसंबर 2025 को चौखुटिया में ‘गैरसैंण आक्रोश’ आयोजित किया जाएगा, जिसे आंदोलनकारियों ने सरकार के “बहरेपन” के खिलाफ निर्णायक संघर्ष बताया है।
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इस आंदोलन का नेतृत्व पूर्व IAS अधिकारी एवं समिति के मुख्य संयोजक विनोद प्रसाद रतूड़ीकर रहे हैं। समिति का कहना है कि
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#बनभूलपुरा #अतिक्रमण केस पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आने वाला है।
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#हल्द्वानी और बनभूलपुरा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस, रेलवे पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और जिला प्रशासन लगातार तैनात हैं। इलाके को जीरो-ज़ोन घोषित किया गया है, ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिए गए हैं, भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई है और क्षेत्र में फ्लैग मार्च, बैरिकेडिंग और सीसीटीवी निगरानी बढ़ा दी गई है। #मुख्यमंत्री #पुष्कर_सिंह_धामीने
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अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस (International Day for Tolerance) हर वर्ष 16 नवम्बर को मनाया जाता है।
इस दिवस को मनाने की पहल संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने वर्ष 1996 में की थी।
इसका उद्देश्य विश्वभर में धर्म, भाषा, संस्कृति, विचारधारा और जीवनशैली की विविधताओं के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा देना है।
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इसकी नींव यूनेस्को (UNESCO) द्वारा वर्ष 1995 में “Declaration of Principles on Tolerance” को अपनाने के साथ रखी गई थी।
इस घोषणा में कहा गया था कि –
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“सहिष्णुता का अर्थ है
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16 नवम्बर 1945 को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की स्थापना की गई थी।
इसका उद्देश्य विश्वभर में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था।
द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहता के बाद दुनिया को एक ऐसे मंच की आवश्यकता थी जो मानवता को जोड़ सके और “मानव मस्तिष्क में शांति” की भावना को प्रोत्साहित करे — इसी से यूनेस्को का जन्म हुआ।
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उत्तराखंड में आज भूकंप और अन्य आपदा स्थितियों से निपटने के लिए प्रदेश-भर में बड़े पैमाने पर मॉक-ड्रिल आयोजित की गई। इस राज्यव्यापी अभ्यास में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी सहित 80 से अधिक लोकेशन शामिल रहीं। इस ड्रिल का उद्देश्य यह जानना था कि किसी वास्तविक भूकंप या आपदा की स्थिति में राहत-बचाव एजेंसियाँ कितनी तत्परता और समन्वय के साथ काम करती हैं।
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ड्रिल के दौरान कई स्थानों पर भवनों को क्षतिग्रस्तदिखाया गया, और पूरे कार्यक्रम को वास्तविक आपदा जैसा माहौल देने के
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15 नवंबर 1875 को बंगाल (वर्तमान झारखंड क्षेत्र) में जन्मे बीरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमर नाम हैं। उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ जनजातीय समाज को संगठित कर "उलगुलान" (महान आंदोलन) का नेतृत्व किया।
उनकी प्रेरणादायक गाथा ने न केवल आदिवासी समुदाय को एक नई दिशा दी बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
आज, 15 नवंबर को पूरे देश में “बीरसा मुंडा जयंती” मनाई जाती है। भारत सरकार ने इस दिन को “जनजातीय गौरव दिवस” (Tribal Pride Day)के रूप में मनाने की घोषणा की
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