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उत्तराखंड में “सतर्कता-हमारी साझा जिम्मेदारी” जैसे अभियानों ने सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई लहर पैदा की है। बीते वर्षों में राज्य सरकार और सतर्कता विभाग ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें हेल्पलाइन 1064, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, और जन-जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य है — जनता को यह भरोसा दिलाना कि शिकायतें अब केवल सुनी नहीं जाएँगी, बल्कि उन पर कार्रवाई भी होगी।
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देहरादून सचिवालय सहित विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में अधिकारियों और
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देहरादून और उत्तराखंड के अन्य शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए हैं। रात के समय सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर नाइट पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क, और पिंक पेट्रोल यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं। लेकिन सवाल यह है — क्या ये प्रयास जमीनी स्तर पर उतने ही प्रभावी हैं, जितने काग़ज़ों पर दिखते हैं?
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पुलिस डेटा के अनुसार, देहरादून में रात्री गश्त की संख्या में 30% की वृद्धि हुई है। शहर में अब “CCTV आधारित रूट मॉनिटरिंग” और “कंट्रोल रूम रिस्पॉन्स टीम
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उत्तराखंड, जिसे "देवभूमि" कहा जाता है, अब इको-टूरिज़्म (Eco-Tourism) के क्षेत्र में देशभर में एक नई पहचान बना रहा है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार दोनों को जोड़ने वाली पहलें तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखंड में इको-टूरिज़्म स्थलों की संख्या में 40% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिनमें कॉर्बेट, अस्कोट, नैनीताल, चकराता, और टिहरी झील प्रमुख हैं।
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इको-टूरिज़्म का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्थायी विकास (Sustainable
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देहरादून का घंटाघर आज फिर सचमुच “धड़क” रहा था। शाम 5 बजकर 25 मिनट पर जब मैं लैंसडाउन चौक के ठीक नीचे खड़ा था, तो ऊपर वाली बड़ी सुई ने एक झटके में 5 पर कदम रखा और छोटी सुई ने 25 को चूम लिया। ठीक उसी पल घंटाघर ने गंभीर आवाज में पाँच बार “घंट-घंट-घंट-घंट-घंट” बजाया, जैसे 112 साल पुराना दिल फिर जवानी में लौट आया हो। नीली एलईडी लाइटें भी पहली बार इतनी साफ चमकीं कि दूर राजपुर रोड से भी लोग रुक-रुक कर तस्वीरें ले रहे थे।
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दिल्ली से आए मिस्त्री भाइयों ने बताया कि अंदर का जर्मन मेकैनिज्म इतना जंग खाया
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देहरादून, 22 अक्टूबर 2025:
दीपावली की रात देहरादून में कुल 12 स्थानों पर आग लगने की घटनाएँ हुईं। इनमें से सबसे गंभीर घटनाएँ मेहुवाला और निरंजनपुर मंडी से सामने आईं।
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मेहुवाला में एक प्लास्टिक गोदाम में आग लग गई, जिससे आसपास के इलाके में धुआँ फैल गया और स्थानीय लोगों को सांस लेने में तकलीफ हुई। वहीं, निरंजनपुर मंडी में पटाखों के कारण आग लगने की घटनाएँ हुईं, जिससे दुकानदारों और आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया।
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हालांकि, राहत की बात यह है कि इन घटनाओं में किसी की जान का नुकसान नहीं हुआ और
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