देहरादून। दिल्ली और देहरादून के बीच का सफर अब न केवल छोटा हो गया है, बल्कि यह पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की एक अनूठी मिसाल भी बन गया है। इस एक्सप्रेस-वे का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा है—राजाजी नेशनल पार्क के संवेदनशील क्षेत्र में बना 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर।
एशिया का सबसे लंबा कॉरिडोर यह कॉरिडोर एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ गलियारों में से एक माना जा रहा है। इसे विशेष रूप से राजाजी नेशनल पार्क के भीतर हाथियों, बाघों और अन्य जंगली जानवरों की बेरोकटोक आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जमीन से काफी ऊंचाई पर होने के कारण, नीचे के जंगलों में जानवरों का जीवन एक्सप्रेस-वे की रफ्तार से पूरी तरह अप्रभावित रहेगा।
हाथियों के लिए सुरक्षित रास्ता अक्सर देखा जाता था कि मोहंड और दून के बीच सड़क पार करते समय वन्यजीव हादसों का शिकार हो जाते थे। इस कॉरिडोर के बन जाने से अब जानवरों और वाहनों का आमना-सामना नहीं होगा। हाथियों के पारंपरिक रास्तों (Elephant Corridors) को ध्यान में रखते हुए पिलर्स की ऊंचाई और दूरी तय की गई है, ताकि वे बिना किसी डर के एक्सप्रेस-वे के नीचे से गुजर सकें।
पर्यटकों के लिए खास अनुभव देहरादून आने वाले पर्यटकों के लिए यह 12 किमी का सफर किसी रोमांच से कम नहीं होगा। घने जंगलों के ऊपर से गुजरते हुए उन्हें प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। साथ ही, वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह आधुनिक इंजीनियरिंग और प्रकृति के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
इको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल एक्सप्रेस-वे के इस हिस्से में ध्वनि अवरोधक (Noise Barriers) लगाए गए हैं ताकि वाहनों के शोर से जंगल के जानवरों को परेशानी न हो। साथ ही, रात के समय लाइट का फोकस इस तरह रखा गया है कि वह जंगल की तरफ न जाए और वन्यजीवों की स्वाभाविक दिनचर्या बाधित न हो।


