देहरादून में 19 और 20 सितंबर को ‘अपनी धरोहर’ संस्था द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘धरोहर संवाद’ का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाने और उसे प्रगति के पथ पर ले जाने के तरीकों पर चर्चा करना है। इस संवाद का मुख्य विषय ‘संस्कृति, प्रकृति और प्रगति’ है, जो राज्य के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्णT मुद्दा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य और चर्चा के बिंदु
इस संवाद में देश भर के जाने-माने विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी, इतिहासकार, पर्यावरणविद् और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। पहले दिन की चर्चा में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- संस्कृति का संरक्षण: उत्तराखंड की पारंपरिक कला, लोकगीत, लोकनृत्य और भाषा को कैसे संरक्षित किया जाए, इस पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
- प्रकृति का सम्मान: राज्य के नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को विकास परियोजनाओं से होने वाले नुकसान से कैसे बचाया जाए, इस पर गहन चर्चा हुई।
- प्रगति का रास्ता: संस्कृति और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए किस तरह से विकास किया जाए ताकि वह स्थायी हो और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाए।
इस संवाद से निकले सुझावों को सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाएगा ताकि उत्तराखंड के भविष्य के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जा सके।
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