महिला सुरक्षा और रात्री गश्त व्यवस्था: कितना प्रभावी सिस्टम?
देहरादून और उत्तराखंड के अन्य शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए हैं। रात के
देहरादून और उत्तराखंड के अन्य शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए हैं। रात के
उत्तराखंड, जिसे “देवभूमि” कहा जाता है, अब इको-टूरिज़्म (Eco-Tourism) के क्षेत्र में देशभर में एक नई पहचान बना रहा है। हिमालय की गोद
उत्तराखंड, जिसे “देवभूमि” कहा जाता है, प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक महत्व का अद्भुत संगम है। राज्य के 13 जिले अपने-अपने भौगोलिक,
देहरादून, जिसे प्यार से “दून” कहा जाता है, सिर्फ उत्तराखंड की राजधानी नहीं बल्कि संवेदनाओं, यादों और इतिहास का शहर है। यहाँ की
ऋषिकेश का विश्व प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट – जहाँ गंगा-यमुना-सरस्वती का पवित्र संगम है, जहाँ रोज हजारों श्रद्धालु पाप धोने आते हैं – आज
देहरादून के बड़े अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों ने खुलासा किया कि हर महीने औसतन 5 लोग ‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ (BPD)
देहरादून का घंटाघर आज फिर सचमुच “धड़क” रहा था। शाम 5 बजकर 25 मिनट पर जब मैं लैंसडाउन चौक के ठीक नीचे खड़ा
देहरादून बार एसोसिएशन के अनुसार, अधिवक्ताओं के विरोध का मुख्य कारण स्थान (Space) की कमी है। अधिवक्ताओं की मांग है कि जिला प्रशासन
देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया जहां अभिव्यक्ति, संवाद और जुड़ाव का सबसे बड़ा मंच बन गया है, वहीं यह अपराध की