उत्तराखंड में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उत्तराखंड सरकार ने हालिया मामलों में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद राज्यभर के चिकित्सकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे बच्चों को प्रतिबंधित कफ सिरप न लिखें। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी तेज कर दी है, जहां प्रतिबंधित दवाओं की जांच हो रही है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की एडवाइजरी के अनुपालन में की जा रही है, ताकि जनस्वास्थ्य को खतरा न हो। #UttarakhandHealth #BannedCoughSyrup
अन्य राज्यों में मौतों का मामला मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया है। विशेष रूप से कोल्ड्रिफ जैसे सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मौजूदगी से किडनी फेलियर के केस सामने आए हैं। उत्तराखंड में अभी तक ऐसी मौतें दर्ज नहीं हुई हैं, लेकिन सतर्कता बरतते हुए सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। यह मुद्दा 2022 के गाम्बिया कांड की याद दिलाता है, जहां भारतीय सिरप से 66 बच्चों की मौत हुई थी। #ChildSafety #CoughSyrupDeaths
सरकार की कार्रवाई: छापेमारी और नमूना संग्रह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर 4 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग व एफडीए की संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर के मेडिकल स्टोरों, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों पर छापे मारे। देहरादून के जोगीवाला, मोहकमपुर जैसे क्षेत्रों में निरीक्षण हुआ। सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को इस महीने के भीतर कफ सिरप के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच के आदेश दिए गए हैं। दोषपूर्ण दवाओं को बाजार से हटाने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। #UttarakhandRaids #FDAAction
प्रतिबंधित दवाओं की सूची: क्या है प्रतिबंध केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई खांसी-जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए। चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए डेक्सट्रोमेथोर्फन, फिनाइलफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड और क्लोरफेनिरामाइन मेलेट युक्त संयोजन वाली दवाएं पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इनका सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है। केवल विशेषज्ञ सलाह पर ही न्यूनतम खुराक दी जा सकती है। #BannedMedicines #ChildHealthGuidelines
डॉक्टरों और स्टोरों को निर्देश: जिम्मेदारी का आह्वान स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी चिकित्सकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित सिरप न लिखें, क्योंकि इससे मेडिकल स्टोर भी इन्हें बेचते रहेंगे। उन्होंने कहा, “यदि चिकित्सक इन सिरप को लिखेंगे तो मेडिकल स्टोर भी उन्हें बेचेंगे। इसलिए डॉक्टर स्वयं जिम्मेदारी दिखाएं।” सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को एडवाइजरी लागू करने के आदेश दिए गए हैं। आम जनता से भी डॉक्टर की सलाह बिना दवा न खरीदने की अपील की गई है। #DoctorInstructions #PublicHealthAlert
अधिकारियों के बयान: प्रतिबद्धता का संदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जोर दिया कि राज्य केंद्र की एडवाइजरी का पूरी गंभीरता से पालन कर रहा है। एफडीए अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया, “टीमें सक्रिय हैं, दोष पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।” डॉ. राजेश कुमार ने आगे कहा, “बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई विषय नहीं।” #CMDhami #HealthMinisterRawat #BannedCoughSyrup #UttarakhandNews #ChildSafetyUttarakhand #HealthDepartment #FDARaids #PushkarSinghDhami #DoctorAlert #PublicHealth2025 #CoughSyrupBan #UttarakhandReforms