कैप्टन लक्ष्मी सहगल का परिचय और जन्मदिन का महत्व
कैप्टन लक्ष्मी सहगल (जन्म नाम: लक्ष्मी स्वामीनाथन) एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, डॉक्टर और आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट की कमांडर थीं। उनका जन्म 24 अक्टूबर 1914 को चेन्नई में एक तमिल परिवार में हुआ था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें रेजिमेंट का नेतृत्व सौंपा, जहां उन्होंने डॉक्टर की ड्यूटी छोड़कर बंदूक उठाई और महिलाओं को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ीं। 1998 में पद्म विभूषण से सम्मानित सहगल 2012 में निधन हो गया, लेकिन उनकी देशभक्ति आज भी प्रेरणा स्रोत है। 24 अक्टूबर को उनकी जयंती पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो युवाओं को राष्ट्रप्रेम सिखाते हैं।
जिम्प पायनियर स्कूल, प्रेमनगर में आयोजित कार्यक्रम
देहरादून के प्रेमनगर स्थित जिम्प पायनियर स्कूल में कैप्टन लक्ष्मी सहगल की 111वीं जयंती (2025) पर एक विशेष सभा का आयोजन किया गया। छात्रों ने उनकी जीवनी पर चर्चा की, जिसमें रानी झांसी रेजिमेंट में महिलाओं की भूमिका और नेताजी के साथ उनके योगदान पर फोकस रहा। स्कूल प्राचार्य ने बताया कि यह कार्यक्रम छात्रों को इतिहास से जोड़ने का माध्यम है, जहां नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ और पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से सहगल की बहादुरी को जीवंत किया गया। बड़ी संख्या में अभिभावक भी शामिल हुए, जो इस तरह के आयोजनों को सराहनीय मानते हैं। यह कार्यक्रम देहरादून के शैक्षिक संस्थानों में राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है।
छात्रों की चर्चा और ली गई प्रेरणा
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने ग्रुप डिस्कशन में सहगल की देशभक्ति पर गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने चर्चा की कि कैसे एक डॉक्टर ने अपनी सुरक्षा त्यागकर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, और महिलाओं को सशक्त बनाया। एक छात्रा ने कहा, “कैप्टन लक्ष्मी ने साबित किया कि महिलाएं भी मोर्चे पर खड़ी हो सकती हैं।” चर्चा के अंत में छात्रों ने संकल्प लिया कि वे उनके आदर्शों पर चलेंगे, जैसे सामाजिक सेवा और राष्ट्रहित। स्कूल ने छात्रों को प्रमाण-पत्र वितरित किए, जो उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा। यह सत्र न केवल इतिहास सिखाता है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करता है।
भविष्य की प्रासंगिकता और संदेश
कैप्टन लक्ष्मी सहगल की जयंती ऐसे समय में प्रासंगिक है जब युवाओं को राष्ट्रभक्ति की आवश्यकता है। जिम्प पायनियर स्कूल का यह प्रयास अन्य संस्थानों के लिए उदाहरण है, जहां इतिहास को जीवंत बनाकर नैतिक मूल्य सिखाए जा सकते हैं। सहगल का जीवन सिखाता है कि व्यक्तिगत त्याग से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। यदि ऐसे कार्यक्रम बढ़े, तो नई पीढ़ी मजबूत बनेगी।
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