स्थानीय बाजार बनाम मॉल संस्कृति — कौन टिकेगा ज़्यादा?
देहरादून और उत्तराखंड के अन्य शहरों में बीते कुछ वर्षों में मॉल संस्कृति ने तेज़ी से जगह बनाई है। राजपुर रोड से लेकर हरिद्वार बाईपास तक चमकदार ब्रांडेड शो-रूम और एयर-कंडीशंड शॉपिंग मॉल्स अब शहरी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इसी के बीच सवाल उठता है — क्या स्थानीय बाजार, जो दशकों से