देहरादून में खनन पट्टों के लिए आरक्षित करीब 500 एकड़ सरकारी भूमि अदृश्य हो चुकी है। यह चौंकाने वाला मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच गई है।
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जानकारी के अनुसार, वर्ष 1985 में खनन पर रोक लगने के बाद यह जमीन जिलाधिकारी की कस्टडी में दी गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी नियंत्रण बनाए रखना और अवैध कब्जों को रोकना था।
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लेकिन समय के साथ जमीन की वास्तविक स्थिति का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहा। कब्जे की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू नहीं की गई, जिसके कारण बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और गायब होने जैसी स्थिति सामने आई।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। राजस्व और खनन विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे भूमि का ब्योरा तैयार करें और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करें।
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स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार से पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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