देहरादून

देहरादून में हैंड फुट-माउथ डिजीज (HFMD) का प्रकोप: स्कूलों में अलर्ट जारी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों बच्चों के बीच हैंड फुट-माउथ डिजीज (HFMD) संक्रमण का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। यह एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से कॉक्ससैकी वायरस (Coxsackievirus) जैसे एंटरोवायरस के कारण होती है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी एक संक्रमित बच्चे से दूसरे बच्चे में बहुत तेजी से फैलती है, खासकर 6 साल से कम उम्र के बच्चों को यह जल्दी प्रभावित करती है। शहर के अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे बच्चों की संख्या रोजाना बढ़ रही है, जिसके चलते अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग में चिंता बढ़ गई है। इस संक्रामकता को देखते हुए, देहरादून के कई स्कूलों ने अभिभावकों के लिए विशेष अलर्ट और एडवाइजरी जारी कर दी है। #DehradunHFMD #HFMDOutbreak #HandFootMouthDisease #DehradunAlert #ChildHealth

हैंड फुट-माउथ डिजीज के मुख्य लक्षण और पहचान

हैंड फुट-माउथ डिजीज (HFMD) के लक्षणों को पहचानना संक्रमण की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह बीमारी आमतौर पर बुखार, गले में खराश और भूख कम लगने के साथ शुरू होती है। इसके मुख्य और विशिष्ट लक्षण हैं:

  • तेज बुखार और अस्वस्थता महसूस होना।
  • मुंह के अंदर, जीभ और गालों पर दर्दनाक छाले (अल्सर) या फफोले पड़ना, जिससे बच्चे को खाने और निगलने में कठिनाई होती है।
  • हाथों की हथेलियों, पैरों के तलवों और कभी-कभी डायपर क्षेत्र पर लाल दाने या फफोलेदार चकत्ते दिखाई देना।यह रोग आमतौर पर 7 से 10 दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन संक्रमित बच्चे को इस दौरान आइसोलेट करना बहुत ज़रूरी है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। #HFMDSymptoms #KidsHealth #ViralInfection #Coxsackievirus #MouthUlcers

स्कूलों द्वारा जारी एडवाइजरी और रोकथाम के उपाय

देहरादून में HFMD के बढ़ते मामलों को देखते हुए, स्कूलों ने अभिभावकों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है। स्कूलों की एडवाइजरी में निम्नलिखित मुख्य बातों पर ज़ोर दिया गया है:

  1. तत्काल आइसोलेशन: यदि बच्चे में HFMD के लक्षण दिखें, तो उसे कम से कम 5 से 7 दिन या पूरी तरह ठीक होने तक स्कूल न भेजें
  2. चिकित्सीय परामर्श: लक्षण दिखते ही तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और उनके निर्देशानुसार ही उपचार करें।
  3. स्वच्छता बनाए रखें: बच्चों को बार-बार हाथ धोने के लिए प्रेरित करें, खासकर खाने से पहले और शौच के बाद।
  4. हाइड्रेशन: छालों के कारण बच्चे खाने से बचते हैं, इसलिए उन्हें डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (पानी, सूप, जूस) देते रहें।
  5. संक्रमित वस्तुओं से दूरी: दूषित सतहों, खिलौनों और बर्तनों के संपर्क से बचें और उन्हें साफ रखें। #SchoolAlert #HFMDPrevention #HygieneFirst #IsolationIsKey #ParentingTips

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और निष्कर्ष

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HFMD एक सामान्य वायरल बीमारी है जिससे घबराना नहीं चाहिए, लेकिन इसकी संक्रामकता को देखते हुए बचाव और सतर्कता बहुत ज़रूरी है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के लार, श्वसन स्राव, मल या फफोलों के तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है। मानसून के बाद वायरल लोड बढ़ने से ऐसे मामलों में वृद्धि देखी जाती है। संक्रमित बच्चों को पैरासिटामोल से बुखार और दर्द में आराम दिया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है पर्याप्त आराम और घर पर क्वारंटाइन ताकि यह चेन टूट सके। वयस्कों में इसके फैलने की संभावना कम होती है, लेकिन देखभाल करने वालों को भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। #DehradunNews #HealthAdvisory #ViralDisease #Childcare #HFMDCure

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