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देहरादून के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा एंटी-ड्रग्स और साइबर क्राइम का पाठ, DM ने दिए निर्देश

देहरादून। राजधानी देहरादून में युवाओं को नशे की लत से बचाने और इंटरनेट के दौर में बढ़ते ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड व अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की समीक्षा बैठक में शिक्षा प्रणाली को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिला प्रशासन ने फैसला लिया है कि अब शहर के सभी विद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ एंटी-ड्रग्स, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को शुरुआती स्तर से ही इन सामाजिक और तकनीकी खतरों के प्रति जागरूक और सतर्क बनाना है। पीजी, हॉस्टल और कोचिंग सेंटरों पर बढ़ेगी निगरानी बैठक में युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शैक्षणिक परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं। शहर के सभी हॉस्टलों, पेइंग गेस्ट (PG) आवासों, कोचिंग संस्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी (CCTV) निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही चाय-तंबाकू की दुकानों, मेडिकल स्टोरों और स्लम बस्तियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का होगा व्यापक प्रचार जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागीय एजेंसियों (ANTF, STF, पुलिस व NCB) को संयुक्त कार्रवाई कर नशे की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति या सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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