उत्तराखंड सरकार ने जबरन धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब धर्मांतरण विरोधी कानून में संशोधन कर इसे और कठोर बना दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2025’ को मंजूरी दे दी गई है। इस कानून के तहत, अब जिलाधिकारी (DM) को गैंगस्टर एक्ट की तरह कार्रवाई करने का अधिकार होगा, जिसमें आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान भी शामिल है।
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इस नए कानून में, जबरन धर्मांतरण के मामलों में सजा को भी बढ़ाया गया है। अब ऐसे अपराधों के लिए 3 से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा, भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है, जो 10 लाख रुपये तक हो सकता है। कानून के अनुसार, सभी अपराध गैर-जमानती होंगे, जिससे आरोपियों के लिए जमानत मिलना बेहद मुश्किल हो जाएगा। यह कदम धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए उठाया गया है।
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इस कानून में ‘प्रलोभन’ की परिभाषा को भी विस्तृत किया गया है। इसमें उपहार, नकद लाभ, रोजगार, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवन शैली का वादा, या किसी धार्मिक संस्था द्वारा चलाए जा रहे स्कूल या कॉलेज में शिक्षा जैसे प्रलोभन देना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा, किसी धर्म को दूसरे धर्म के मुकाबले हानिकारक तरीके से चित्रित करना और डिजिटल माध्यमों या छद्म पहचान का इस्तेमाल करके धर्मांतरण कराना भी इसी कानून के दायरे में आएगा।
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इस संशोधन का उद्देश्य उत्तराखंड की “देवभूमि” की पवित्रता और संस्कृति की रक्षा करना है। सरकार का मानना है कि इस सख्त कानून से लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसे मामलों पर भी प्रभावी ढंग से रोक लग सकेगी। इस कानून के तहत, पीड़ित को चिकित्सा, यात्रा और पुनर्वास खर्च के लिए मुआवजा भी दिया जाएगा। यह कदम धार्मिक सद्भाव बनाए रखने और राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने की साजिशों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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