देहरादून और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में भारी बारिश और बादल फटने से मची तबाही के बाद, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने राज्य सरकार से आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन की मांग की है। यूकेडी का कहना है कि सरकार को उन गांवों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो भूस्खलन और नदी के कटाव के खतरे से जूझ रहे हैं।
यूकेडी के कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. शक्ति शैल कपरूवान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ‘आपदा प्रबंधन’ नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर साल आपदा आती है, लेकिन सरकार सिर्फ मुआवजे और राहत कार्यों तक सीमित रह जाती है। यूकेडी का मानना है कि इन गांवों का स्थायी समाधान केवल विस्थापन है, जिससे भविष्य में होने वाले जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।
यूकेडी ने मांग की है कि सरकार को एक विशेष कार्यबल (Task Force) का गठन करना चाहिए, जो भूवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मदद से राज्य में आपदा-प्रवण क्षेत्रों की पहचान करे। इसके बाद, एक समयबद्ध योजना के तहत इन गांवों का सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन किया जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि इस विस्थापन प्रक्रिया में प्रभावित लोगों को विश्वास में लिया जाना चाहिए और उन्हें पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाना चाहिए।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा प्रबंधन के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का सही उपयोग नहीं किया है। यूकेडी ने सरकार से इस मामले की जांच कराने की भी मांग की है।
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